April 16, 2026

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क्या अमेरिका में 100 साल पुराने चर्च को मंदिर में बदल दिया गया ?

अमेरिका के एक 100 साल पुराने चर्च को मंदिर में बदल दिया गया है। यहां पर भगवान की मूर्तियां स्थापित हो चुकी हैं और हिंदुओं ने पूजा पाठ भी शुरू कर दिया है। आपने आज से पहले कई बार लोगों के धर्म परिवर्तन की बात सुनी होगी। कई बार ये धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से होता है तो कई बार डरा-धमकाकर लालच देकर भी इसे कराया जाता है। लेकिन अमेरिका में चर्चा के धर्म परिवर्तन की खबर इससे बिल्कुल अलग है।

अमेरिका के ओहवो राज्य के क्लीवलैंड में इस मंदिर का निर्माण किया गया है। ये मंदिर पहले एक 100 साल पुराना एक चर्च था। जिसे स्वामी नारायण संप्रदाय ने 180 करोड़ रुपए में खरीदा फिर दो साल के अंदर इस चर्च को मंदिर में बदल दिया। इस चर्च को मंदिर में बदलने के दौरान इसकी वास्तुकला में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। इस मंदिर में भारतीय मंदिरों जैसे गुंबद और शिखर जैसी स्थापिय शैली का इस्तेमाल किया गया है। इस मंदिर की कुल जमीन 4.13 एकड़ है। जबकि मंदिर परिसर जो पहले एक चर्च था वो 19 हजार वर्ग फुट में फैला हुआ है।

विदेशों में बसे हिंदुस्तानी किस तरह अपनी संस्कृति को भारत से बाहर मजबूत कर रहे हैं वो आपके इस खबर से पता लग गया होगा। पुराने भवन को मंदिर के लिए उपयुक्त बनाने के लिए जीर्णोद्धार पर लगभग 1 मिलियन डॉलर की लागत आई, जबकि चर्च की वास्तुकला में कोई बदलाव नहीं किया गया।

अमेरिका में बने तीनों मंदिरों के बारे में जानकारी देते हुए वड़ताल गादी के अध्यक्ष डॉ. संतवल्लभ स्वामी ने बताया कि क्लीवलैंड, ओहियो में नित्य स्वरूप स्वामी सरदार, रैले, नॉर्थ कैरोलिना में भक्तिप्रकाश स्वामी और फ़्रेमोंट, सैन जोस में देवप्रकाशदासजी स्वामी द्वारा मंदिरों का निर्माण किया गया। तीनों मंदिरों में मूर्तियां और सिंहासन भारत में तैयार करके वड़ताल संस्था द्वारा भेजे गए हैं। राकेशप्रसादजी महाराज तीनों मंदिरों में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह संपन्न कराएंगे। उन्होंने आगे बताया कि इन मंदिरों में भगवान स्वामीनारायण सहित सभी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।

वडतालधाम हिंदू मंदिर से वहां रहने वाले गुजरातियों को क्या लाभ होगा?

धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध स्थापित होंगे

संतों का आशीर्वाद और दैनिक आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलेगा

बच्चों और युवाओं को नैतिक शिक्षा मिलेगी

सामुदायिक संबंध और संस्कृति संरक्षित रहेगी

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