‘चीन के जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल कर अमेरिकी ठिकानों पर ईरान ने किए थे हमले!’, अखबार के दावे से भड़का ड्रैगन
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 28 फरवरी से 39 दिन तक युद्ध चला था। इस युद्ध के दौरान ईरान ने खाड़ी देशों सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और इराक में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को भी मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया था। ईरान के हमलों से अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर काफी नुकसान हुआ। अमेरिका के रडार और विमान ईरान ने नष्ट किए। अब फाइनेंशियल टाइम्स अखबार ने दावा किया है कि ईरान ने चीन के जासूसी सैटेलाइट TEE-01B से डेटा हासिल कर अमेरिका के सैन्य अड्डों पर तबाही मचाई थी। इस खबर पर भड़के चीन ने चेतावनी दी है।
अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के खास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी आईआरजीसी ने चीन के सैटेलाइट के जरिए खाड़ी देशों में अमेरिकी सेना की हरकतों पर नजर रखी थी। चीन का टीईई-01बी सैटेलाइट अर्थ आइ कंपनी का बनाया हुआ है। अखबार ने लीक हुए ईरान के सैन्य दस्तावेजों के हवाले से दावा किया है कि आईआरजीसी ने 2024 में चीन के जासूसी सैटेलाइट से डेटा हासिल करना शुरू किया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने ईरान को बीजिंग स्थित एम्पोसैट कंपनी के ग्राउंड स्टेशनों तक पहुंच दी। जिससे ईरान ने डेटा और सैटेलाइट फोटो हासिल किए। खबर में दावा किया गया है कि चीन के सैटेलाइट से ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले से पहले और बाद की तस्वीरें लीं।
अखबार के मुताबिक 13 से 15 मार्च के बीच सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस की फोटो ली गई। यहां अमेरिकी विमानों को ईरान ने निशाना बनाया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े और जॉर्डन के मुवाफ्फक साल्टी एयरबेस की निगरानी भी चीन के सैटेलाइट से की गई। अखबार का कहना है कि इराद के इरबिल एयरपोर्ट और आसपास के इलाकों पर भी ईरान ने नजर रखी। बाद में आईआरजीसी ने यहां हमले का दावा किया। उधर, चीन ने ईरान को सैन्य मदद देने की खबरों को झूठ बताया है। चीन ने चेतावनी दी है कि इन झूठे आरोपों के बाद अगर अमेरिका ने कोई कार्रवाई की या टैरिफ बढ़ाया, तो वो इसका कड़ा जवाब देगा।
