June 15, 2026

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इजरायल की वजह से फेल हो सकता है अमेरिका-ईरान का शांति समझौता, यहूदी देश का लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने से साफ इनकार

तेल अवीव। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान कर दिया है कि उनका देश ईरान से शांति समझौते पर राजी हो गया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को समझौते पर दस्तखत होंगे, लेकिन अमेरिका के करीबी और ईरान के धुर दुश्मन इजरायल का रुख इस समझौते को फेल करने की वजह बन सकता है। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतनयाहू ने साफ कहा है कि उनके देश की सेना लेबनान के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटेगी। साथ ही नेतनयाहू ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले उस वक्त तक जारी रखने की बात कही है, जब तक कि वो इजरायल पर हमले करने में पूरी तरह नाकाम नहीं कर दिया जाता।

इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ ताबड़तोड़ हमले जारी रखे। जिसकी वजह से ट्रंप को नेतनयाहू को फोन कर कहना पड़ा कि वो सैन्य अभियान बंद कर दें। ताकि ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता हो सके। ट्रंप ने इससे पहले भी इजरायल की ओर से लेबनान में हमलों पर नेतनयाहू को फोन कर बेवकूफ तक कहा था। ट्रंप के इस रुख के बावजूद इजरायल के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है। इजरायल का हमेशा कहना रहा है कि वो अपने दुश्मन ईरान और हिजबुल्लाह को ठिकाने लगाकर ही दम लेगा। इजरायल के इस रवैये की वजह से ईरान भी समझौते की राह से पलट सकता है।

दरअसल, इजरायल को सबसे बड़ा खतरा ईरान से है। इजरायल कतई नहीं चाहता कि ईरान किसी तरह का परमाणु कार्यक्रम चलाए। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतनयाहू ने कुछ साल पहले खुफिया जानकारी दिखाकर ये दावा किया था कि ईरान चोरी-छिपे परमाणु बम बना रहा है। वहीं, ट्रंप ने ईरान के साथ जिस शांति समझौते को मंजूरी दी है, उसमें कहा गया है कि इस्लामी देश परमाणु बम नहीं बनाएगा। इस समझौते के 14 मुख्य बिंदुओं में ये नहीं लिखा है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद कर देगा। ऐसे में इजरायल का मानना है कि बगैर उसकी सहमति के ईरान और अमेरिका के बीच किसी समझौते का मतलब नहीं। क्योंकि इस समझौते के बावजूद उसके अस्तित्व को खतरा पैदा हो सकता है।

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