June 28, 2026

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उत्तर प्रदेश रक्षाबंधन: भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

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रविन्द्र बंसल प्रभारी यूपी, यूके / हिंद फोकस न्यूज़ 

उत्तर प्रदेश रक्षाबंधन: भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

लखनऊ। प्रदेश भर में भाई बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन हर्षो उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने भाइयों की दीर्घायु व सुख समृद्धि के लिए लिए पूजा अर्चना की। साथी भाइयों मस्तक पर तिलक कर कलाई पर राखी बांधी, भाइयों ने भी बहनों को रक्षा का वचन देते हुए उपहार दिए।

भाई बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन

रक्षाबंधन, जिसे प्रायः राखी का त्योहार भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के स्नेह, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। यह पर्व हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन पूरे देश में बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन का अर्थ है — “रक्षा का बंधन”, अर्थात वह डोर जो भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत करती है।

 

ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि

रक्षाबंधन की परंपरा सदियों पुरानी है और इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं।

1. द्रौपदी और श्रीकृष्ण – महाभारत काल में, जब श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी, द्रौपदी ने अपने वस्त्र का टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। श्रीकृष्ण ने इसे एक रक्षा सूत्र मानते हुए द्रौपदी की आजीवन रक्षा का वचन दिया।

2. रानी कर्णावती और हुमायूं – मध्यकाल में चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर अपनी और अपने राज्य की रक्षा की गुहार लगाई, जिसे हुमायूं ने स्वीकार किया।

3. यम और यमुनाजी – लोककथाओं के अनुसार, यमुनाजी ने अपने भाई यमराज को रक्षा सूत्र बांधा, जिसके बाद यमराज ने उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद दिया।

 

 

त्योहार का महत्व

रक्षाबंधन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह परिवारिक रिश्तों में प्रेम और जिम्मेदारी का भाव जगाने वाला अवसर है।

भाई के लिए – बहन के सम्मान और सुरक्षा का संकल्प।

बहन के लिए – भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की प्रार्थना।

सामाजिक दृष्टि से – यह पर्व समाज में आपसी विश्वास, प्रेम और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है।

 

 

मनाने की परंपरा

रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान के बाद बहनें पूजा की थाली सजाती हैं, जिसमें राखी, रोली, चावल, दीपक और मिठाई रखी जाती है। भाई के माथे पर तिलक करने और आरती उतारने के बाद बहन राखी बांधती है और मिठाई खिलाती है। बदले में भाई बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा का वचन लेता है।

 

आधुनिक समय में रक्षाबंधन

आज के दौर में रक्षाबंधन का स्वरूप बदल चुका है।

जो भाई-बहन दूर रहते हैं, वे डाक या ऑनलाइन माध्यम से राखी भेजते हैं।

कई संस्थाएं इस दिन सैनिकों, पुलिसकर्मियों और सामाजिक रक्षकों को भी राखी बांधकर उनके योगदान का सम्मान करती हैं।

कुछ लोग पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली राखी का प्रयोग करने लगे हैं।

 

रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि यह विश्वास, त्याग और सुरक्षा का प्रतीक है। यह हमें यह याद दिलाता है कि रिश्तों की डोर केवल खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि प्रेम और जिम्मेदारी से भी बंधी होती है।

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