चुनाव आयोग हटाए गए नामों की लिस्ट वेबसाइट और इन जगहों पर प्रदर्शित करे, बिहार एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में वोटरों के विशेष पुनरीक्षण SIR पर गुरुवार को सुनवाई के बाद अहम निर्देश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वो बिहार में हटाए गए 65 लाख लोगों के नाम की लिस्ट वेबसाइट, बीएलओ के दफ्तर, बीडीओ के दफ्तर और पंचायत भवनों पर प्रदर्शित करे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से ये भी कहा है कि वो बिहार के अखबारों में विज्ञापन देकर लोगों को लिस्ट की जांच करने के लिए कहे। सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम आदेश दिया है कि बिहार में वोटरों के विशेष पुनरीक्षण में आधार कार्ड को दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग ये तीनों काम कर ले। कोर्ट ने कहा कि बिहार में एसआईआर के बारे में आगे की सुनवाई 22 अगस्त को की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि हटाए गए लोगों के नाम जिला स्तर के चुनाव अधिकारी की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा बीडीओ और पंचायतों के दफ्तरों पर भी हटाए गए वोटरों की लिस्ट प्रदर्शित की जाए। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जिनका नाम हटाया गया है, वे अपने दावे के साथ आधार कार्ड दे सकते हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने ये भी कहा कि बूथ स्तर पर मृत लोगों के नाम क्यों नहीं दिए गए? अगर ऐसा किया जाता, तो नैरेटिव नहीं बनता।
बिहार में चुनाव आयोग ने जून में एसआईआर का काम शुरू किया था। 26 जुलाई को एसआईआर का पहला चरण खत्म होने के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की। एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कहा गया था कि एक झटके में 65 लाख लोगों को हटाया गया है। बीते दिनों सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव ने ऐसे दो लोगों को सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने पेश किया था, जिनको मृत बताया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई में तय हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट बिहार में एसआईआर पर क्या अगला कदम उठाता है।
