ट्रंप के टैरिफ से निपटने के लिए चीन को और एफडीआई की मंजूरी दे सकती है मोदी सरकार!, कंपनियों को अधिग्रहण से बचाने के लिए बनाए नियम में ढील संभव
नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप के लगाए 50 फीसदी टैरिफ से निपटने के लिए मोदी सरकार कई कदमों पर विचार कर रही है। अखबार इकोनॉमिक टाइम्स ने खबर दी है कि टैरिफ का मुकाबला करने के लिए मोदी सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई पर कई रियायत दे सकती है। अखबार ने एक सरकारी अफसर के हवाले से बताया है कि जरूरत पड़ी, तो मोदी सरकार प्रेस नोट-3 की समीक्षा कर सकती है। प्रेस नोट-3 की समीक्षा कर अगर बदलाव किया गया, तो चीन से और निवेश की राह खुल सकती है।
प्रेस नोट-3 के मुताबिक भारत के साथ जो देश जमीनी सीमा साझा करते हैं, उनके यहां से विदेशी निवेश के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। अप्रैल 2020 में भारत ने प्रेस नोट-3 लागू किया था। ताकि भारत की कंपनियों को विदेशी अधिग्रहण से बचाया जा सके। चीन से जारी सीमा विवाद के कारण ऐसी आशंका थी कि कम्युनिस्ट देश की कंपनियां भारत की कंपनियों में बड़ा निवेश कर उनको हथिया सकती हैं। ऐसे में मोदी सरकार ने सीमा साझा करने वाले देशों की ओर से तय सीमा से बाहर एफडीआई पर रोक लगाने के लिए नियम बनाया था। अगर प्रेस नोट-3 की मोदी सरकार समीक्षा करती भी है, तो भी इसमें एफडीआई की सीमा तय हो सकती है।
दरअसल, ट्रंप की तरफ से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद चीन ने इसकी निंदा की थी। भारत में चीन के राजदूत ने तो ट्रंप को बुली तक कह दिया था। चीन के राजदूत ने कहा था कि किसी बुली को एक इंच जमीन दी, तो वो एक मील और लेने की कोशिश करेगा। चीन सरकार ने ये भी कहा था कि भारत को संप्रभुता की रक्षा का अधिकार है। चीन की तरफ से ऐसे बयानों के बाद पीएम नरेंद्र मोदी अब एससीओ बैठक में हिस्सा लेने वहां जा भी रहे हैं। मोदी 7 साल बाद चीन के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। इससे पहले गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्तों में बहुत तनाव आ गया था।
