April 24, 2026

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तमिलनाडु की डीएमके सरकार को मद्रास हाईकोर्ट से झटका, कहा- मंदिर का धन राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं सिर्फ देवता का

चेन्नई। मंदिर के धन के उपयोग के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु की डीएमके सरकार को जोर का झटका दिया है। मद्रास हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि भक्तों की ओर से मंदिर को मिला धन राज्य सरकार का नहीं है। हाईकोर्ट ने मंदिर के धन को देवता का बताया है। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि मंदिर के धन का इस्तेमाल सिर्फ धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के 5 आदेश भी रद्द कर दिए, जिनके तहत मंदिर के धन से विवाह मंडप बनाए जाने थे।

तमिलनाड़ु सरकार ने साल 2023 से 2025 के बीच ये आदेश जारी किए थे। इन आदेशों के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया था कि मंदिर के धन के इस्तेमाल का तमिलनाडु सरकार के पास कोई अधिकार नहीं है। याचिका में ये भी कहा गया था कि तमिलनाडु सरकार मंदिर के धन से विवाह मंडप बनवाना चाहती है, जिनको किराए पर दिया जाएगा। ऐसे में ये धर्म का काम नहीं है। जस्टिस एस.एम. सुब्रहमण्यम और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने याचिका की सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि मंदिर के धन का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। तमिलनाडु सरकार के वकील ने इससे पहले दलील दी कि मंदिर के धन का इस्तेमाल समाज के लिए किया जा रहा है। राज्य के वकील ने तर्क दिया कि जो विवाह मंडप बनाए जा रहे हैं, उनमें हिंदुओं की शादी को ही मंजूरी दी जाएगी।

तमिलनाडु सरकार के वकील ने कोर्ट को कहा कि विवाह मंडप बनाने के लिए धनराशि जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि सभी जरूरी मंजूरी लेकर ही विवाह मंडपों का निर्माण किया जाएगा। राज्य की डीएमके सरकार की इस दलील को मद्रास हाईकोर्ट ने नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह संस्कार है। हिंदू मैरिज एक्ट में संविदात्मक तत्व भी हैं। कोर्ट ने कहा कि इस वजह से हिंदू विवाह एक्ट धार्मिक उद्देश्य नहीं है। कोर्ट ने हिंदू धर्मार्थ और धार्मिक बंदोबस्ती एक्ट का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत मंदिरों के धन को सिर्फ पूजा, अन्नदान, तीर्थ यात्रियों के कल्याण और गरीबों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी के लिए इस कानून का उपयोग नहीं हो सकता। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि मंदिर की संपत्ति पर सिर्फ देवता का अधिकार है।

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