उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड होगा खत्म, अब एनईपी के तहत पढ़ेंगे बच्चे, अल्पसंख्यक शिक्षा बिल को गवर्नर ने दी मंजूरी
देहरादून। उत्तराखंड के गवर्नर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अल्पसंख्यक शिक्षा बिल 2025 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही ये अब राज्य में कानून बन गया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा कानून बनने के साथ ही राज्य के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में राज्य सरकार आगे बढ़ी है। इस कानून के बनने के साथ ही उत्तराखंड में अब मदरसा बोर्ड खत्म हो जाएगा। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा कानून लागू होने से राज्य के सभी मदरसों को अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। साथ ही उत्तराखंड के सभी मदरसे राज्य के शिक्षा बोर्ड से जुड़ेंगे।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा बिल को गवर्नर की मंजूरी मिलने को सीएम पीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक समान और आधुनिक शिक्षा प्रणाली बनाने की दिशा में ऐतिहासिक बताया है। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि जुलाई 2026 के सत्र से सभी अल्पसंख्यक स्कूल राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा यानी एनसीएफ और नई शिक्षा नीति यानी एनईपी को अपनाकर चलेंगे। उत्तराखंड में 452 मदरसे रजिस्टर्ड हैं। इसके अलावा उत्तराखंड में सर्वे के दौरान बिना रजिस्ट्रेशन करीब 600 मदरसे चलते पाए गए थे। इनमें से 237 को पुष्कर सिंह धामी सरकार ने बंद करा दिया था।
उत्तराखंड शिक्षा बिल को गवर्नर की मंजूरी मिलने के साथ ही अब राज्य के सभी मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को अन्य स्कूलों की तरह अंग्रेजी, हिंदी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और गणित जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इससे उनका शैक्षणिक स्तर पर विकास तो होगा ही, साथ ही भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और उनको पास करने में भी मदरसे में पढ़ने वाले छात्र सक्षम होंगे। उत्तराखंड पहला राज्य है, जिसने मदरसा बोर्ड को भंग कर सभी मदरसों को राज्य शिक्षा बोर्ड से जोड़ने का फैसला किया है। इस कानून के बाद अब राज्य में अवैध मदरसे चलाने पर भी पूरी तरह रोक लग जाएगी।
