ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डीआरडीओ के हथियारों की निर्णायक भूमिका को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सराहा
नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के 68वें स्थापना दिवस के अवसर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह डीआरडीओ मुख्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने डीआरडीओ वैज्ञानिकों की सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति संगठन की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इसी के साथ रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया है कि डीआरडीओ जल्द ही ‘सुदर्शन चक्र’ की स्थापना कर लेगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य आने वाले एक दशक में देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को एयर डिफेंस कवच प्रदान करना है।
राजनाथ सिंह ने प्रौद्योगिकी विकास के साथ-साथ विश्वास निर्माता बनने के लिए डीआरडीओ की प्रशंसा की। निजी क्षेत्र के साथ डीआरडीओ के सहयोग को स्वीकार करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स के साथ बढ़ते जुड़ाव से एक समन्वित रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा, डीआरडीओ ने अपनी प्रणालियों, प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली में लगातार सुधार किया है। खरीद से लेकर परियोजना प्रबंधन तक, उद्योग के साथ जुड़ाव से लेकर स्टार्टअप्स और एमएसएमई के साथ सहयोग तक, काम को आसान, तेज और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए डीआरडीओ द्वारा स्पष्ट प्रयास किए जा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिवेश के अनुरूप आगे बढ़ते रहने और बदलते समय के अनुरूप प्रासंगिक उत्पाद विकसित करते रहने का आह्वान किया। उन्होंने संगठन से नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने वाले अधिक क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया। डीआरडीओ द्वारा गहन प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रगति से न केवल राष्ट्र की क्षमताओं में वृद्धि होगी, बल्कि रक्षा तंत्र भी मजबूत होगा।
