‘धनवान आरोपियों को भी सामान्य नागरिकों की तरह मुकदमों का सामना करना होगा’, सीजेआई सूर्यकांत ने नई-नई याचिकाओं को अनोखा प्रचलन बताते हुए अपनाया कड़ा रुख
नई दिल्ली। सीजेआई सूर्यकांत ने अमीर आरोपियों की तरफ से नई-नई याचिकाएं दाखिल करने की प्रवृत्ति पर कड़ा रवैया अपनाया है। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच में मंगलवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने उन याचिकाओं पर सख्त तेवर दिखाया, जिनमें धनी आरोपी उन कानूनों को ही चुनौती देने लगे हैं, जिनके आधार पर ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाला मामले की सुनवाई कर रही थी। ये कथित घोटाला 3600 करोड़ का है। सुनवाई के दौरान आरोपी गौतम खेतान के वकील की ओर से दाखिल याचिकाओं पर दलील दी जा रही थी।
दलील सुनने पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सिर्फ इस वजह से ऐसे आरोपियों की विशेष सुनवाई की अर्जी को नहीं सुनेगा, क्योंकि वे पैसेवाले हैं और सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकते हैं। सीजेआई ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट ऐसी याचिकाओं पर गंभीर रुख अपनाएगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सिर्फ इस वजह से कोई शख्स साधन संपन्न है और कानून के कारण असहज महसूस कर रहा है, तो वो सीधे कोर्ट आकर उन कानूनों की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता। सीजेआई सूर्यकांत ने इसे अनोखा प्रचलन बताया। उन्होंने कहा कि धनवान आरोपियों को भी अन्य सामान्य नागरिकों की तरह मुकदमों का सामना करना होगा। गौतम खेतान के वकील ने सीजेआई की बेंच को ये बताया था कि उनके क्लाइंट मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की खास धारा 44(1)(सी) की वैधता को चुनौती दे रहे हैं। सीजेआई ने इस याचिका पर अलग से सुनवाई से इनकार कर दिया। फिर आरोपी गौतम खेतान के वकील ने इसे अन्य याचिकाओं से जोड़ने की गुहार लगाई।
जस्टिस सूर्यकांत ने सीजेआई का पद संभालने के बाद से कई अहम फैसले किए हैं। सीजेआई बनने के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की ओरल मेंशनिंग को बंद करा दिया है। अब किसी अहम मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तुरंत सुनवाई तभी करेगा, जब मामला जीवन बचाने या मौलिक अधिकार हनन का हो। इसके अलावा सीजेआई सूर्यकांत ने ये नियम भी बनाया है कि अब वकीलों को अपने केस की सुनवाई से तीन दिन पहले मामले के बारे में 5 पेज की जानकारी दाखिल करनी होगी और बहस के लिए लिया जाने वाला वक्त भी कोर्ट को बताना होगा। ताकि मुकदमों का जल्दी निपटारा किया जा सके।
