जस्टिस यशवंत वर्मा को संसदीय समिति के समक्ष पेश होने का निर्देश, सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
नई दिल्ली। कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा गठित तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पेशी की समयसीमा बढ़ाने की मांग वाली जस्टिस वर्मा की अर्जी को खारिज कर दिया है। जबकि अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा स्पीकर के द्वारा गठित जांच कमेटी की वैधानिकता को चुनौती देने वाली जस्टिस वर्मा की याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद आज शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
जस्टिस वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक दिन पहले ही बुधवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने इस धारणा पर सवाल उठाया था कि अगर राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो जाए और उसी दिन लोकसभा में उसी प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाए तो उसे विफल कैसे माना जा सकता है। बता दें कि जस्टिस वर्मा ने लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा गठित जांच कमेटी को चुनौती देते हुए अपनी याचिका में कहा है कि उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को राज्यसभा के चेयरमैन ने खारिज कर दिया है। जस्टिस वर्मा ने तर्क दिया कि जब संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव एक ही दिन दिया जाता है तो उसे आगे बढ़ाने और ज्वाइंट कमेटी के गठन के लिए यह जरूरी है कि दोनों सदनों में प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए।
गौरतलब है कि पिछले साल होली के दिन जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान फायर ब्रिगेड कर्मियों को घर में बने एक स्टोर रूम में बड़ी संख्या में जला हुआ कैश मिला था। जिस वक्त आग लगी जस्टिस वर्मा घर पर नहीं थे। इसके बाद जस्टिस वर्मा भ्रष्टाचार मामले में घिर गए और उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल कोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर दिया गया था।
