– रविन्द्र बंसल –
लोनी । क्षेत्र में अवैध खनन अब किसी गुप्त गतिविधि का विषय नहीं रहा, बल्कि यह खुलेआम कानून, पर्यावरण और जनसुरक्षा को चुनौती देता दिखाई दे रहा है। यमुना नदी के खादर क्षेत्र में स्थित अलीपुर बांध के अंदर, जहां राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियमों के अनुसार खनन पूर्णतः प्रतिबंधित है, वहां भारी पोकलेन मशीनों और बड़े-बड़े डंपरों से बालू का अवैध खनन बेरोकटोक जारी है। सबसे गंभीर और कानूनन आपराधिक पहलू यह है कि यमुना नदी की बीच धार, यानी बहते पानी के अंदर से बालू निकाली जा रही है, जबकि यह कार्य पूर्णतया प्रतिबंधित है। इसके बावजूद खनन माफिया खुलेआम नदी की धारा से छेड़छाड़ कर रहे हैं और जिम्मेदार विभाग मौन दर्शक बने हुए हैं।
नदी की धारा से खिलवाड़, बांध और आबादी खतरे में
बीच धार से हो रहा खनन यमुना की प्राकृतिक संरचना को नष्ट कर रहा है। कई स्थानों पर नदी की धारा जबरन मोड़ी जा रही है, जिससे कटाव, जलस्तर में असंतुलन और अलीपुर बांध की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। बीते दिनों बांध में हुए रिसाव के कारण रामपुर, खानपुर, नवादा, मीरपुर पचरा, ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र और बदरपुर जैसे इलाके जलमग्न हो चुके हैं। यह घटना चेतावनी थी, लेकिन इसके बावजूद खनन जारी रहना इस ओर इशारा करता है कि सबक लेने के बजाय आंखें मूंद ली गईं।
एनजीटी के नियम कागजों में, जमीन पर खनन
एनजीटी के नियम स्पष्ट हैं—
– बांध से 600 मीटर की परिधि में खनन पूरी तरह वर्जित
– नदी की बीच धार और बहते पानी में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध
– भारी मशीनों और बड़े डंपरों का प्रयोग अवैध
लोनी में इन सभी नियमों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। यह केवल नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रशासनिक नियंत्रण के ढहने का संकेत है।
एमएम-11 व्यवस्था ध्वस्त, राजस्व को भारी नुकसान
बालू परिवहन के लिए अनिवार्य एमएम-11 (रवन्ना) व्यवस्था भी केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
अधिकांश वाहन बिना एमएम-11 के बालू ढो रहे हैं
———————-
अनुमति कुछ घन मीटर की, जबकि खनन कई गुना अधिक
यदि सभी वाहनों को नियम अनुसार एमएम-11 दिया जाए, तो वास्तविक खनन का आंकड़ा सामने आ सकता है। इससे यह भी स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार को भारी राजस्व हानि हो रही है।
मसूदाबाद बांमला में मिट्टी खनन से उजड़ा इलाका
लोनी तहसील क्षेत्र के मसूदाबाद बांमला में अवैध मिट्टी खनन ने क्षेत्र की पहचान ही बदल दी है।
कभी समतल रही भूमि अब 20–25 फुट गहरे गड्ढों में तब्दील
पूरा इलाका ऊबड़-खाबड़ और जंगल जैसी स्थिति में
जंगली जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास नष्ट, जीवन संकट में
खनन से उड़ती मिट्टी, शोर और भारी वाहनों की आवाजाही ने प्रदूषण को गंभीर स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
———————–
शिकायतें वर्षों से, निरीक्षण आज तक नहीं
ग्रामीणों और किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं द्वारा वर्षों से अवैध खनन की शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने स्थलीय निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठाई। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
धरना हुआ था, लेकिन अब चुप्पी क्यों?
यह भी उल्लेखनीय है कि कई वर्ष पहले क्षेत्र में अवैध खनन के विरोध में जनप्रतिनिधियों द्वारा धरना-प्रदर्शन तक किया गया था, लेकिन आज हालात और अधिक गंभीर हो चुके हैं। अब वही अवैध खनन पहले से अधिक तीव्र गति से जारी है, लेकिन न तो कोई आंदोलन दिखता है और न ही कोई ठोस हस्तक्षेप। यही मौन आज सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
जिला प्रशासन और एनजीटी से तीखे सवाल
यमुना की बीच धार से खनन पूर्ण प्रतिबंधित होने के बावजूद यह किसकी शह पर हो रहा है?
अलीपुर बांध जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं?
बिना एमएम-11 चल रहे डंपरों पर कार्रवाई कब होगी?
मसूदाबाद बांमला में भूगोल बदलने के बाद भी निरीक्षण क्यों नहीं?
लोनी में अवैध खनन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह कानून, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जवाबदेही का प्रश्न बन चुका है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो परिणाम यमुना, बांध, वन्यजीव और आम नागरिक—सभी के लिए घातक हो सकते हैं।
















Leave a Reply