यमुना में अवैध खनन : प्रशासनिक संरक्षण में चल रहा 60 घाटों का संगठित खेल
एनजीटी की सख्ती से हिला तंत्र, पुलिस–खनन विभाग कटघरे में
रविन्द्र बंसल
गाजियाबाद । जनपद के लोनी क्षेत्र में यमुना नदी में अवैध खनन अब केवल नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध, प्रशासनिक संरक्षण और जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर संकट बन चुका है। लोनी क्षेत्र के यमुना खादर में चल रहे इस कथित अवैध कारोबार ने ग्रामीणों की जान, पर्यावरण की स्थिरता और प्रदेश सरकार के राजस्व—तीनों को एक साथ खतरे में डाल दिया है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली द्वारा पारित ताज़ा आदेश ने इस पूरे तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। एनजीटी ने पुलिस आयुक्त, गाजियाबाद और जिला खनन अधिकारी से शपथपत्र सहित जवाब मांगकर साफ कर दिया है कि अब लापरवाही या पर्दादारी बर्दाश्त नहीं होगी।
रात के अंधेरे में मशीनों का कहर, प्रशासन मूकदर्शक!
एनजीटी में दाखिल याचिका और रिजॉइंडर में आरोप लगाया गया है कि 2 जनवरी 2026 की रात करीब 9:30 बजे यमुना नदी में पट्टा क्षेत्र से बाहर भारी मशीनों द्वारा गहराई तक खनन किया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि—
जिलाधिकारी
पुलिस प्रशासन
जिला खनन अधिकारी
को तत्काल सूचना दी गई, इसके बावजूद मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
यह सवाल सीधे खड़ा करता है कि क्या प्रशासन की चुप्पी केवल लापरवाही थी या किसी बड़े खेल का हिस्सा?
GRAP-III और IV भी बेअसर, आदेश कागजों में कैद!
मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब यह आरोप सामने आता है कि—
16 जनवरी को GRAP-III
17 जनवरी को GRAP-IV
लागू होने के बावजूद यमुना खादर में खनन गतिविधियां जारी रहीं। 18 जनवरी 2026 के फोटो एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं, जिन पर अधिकरण ने तीखी टिप्पणी करते हुए प्रशासन से सीधा जवाब मांगा है। यह स्थिति प्रदूषण नियंत्रण आदेशों की खुली अवहेलना और सरकारी आदेशों की औकात पर सवाल खड़े करती है।
60 से अधिक घाटों पर फैला जाल, बिना संरक्षण असंभव!
ग्रामीणों और सूत्रों का सनसनीखेज दावा
स्थानीय ग्रामीणों और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार—
यमुना खादर क्षेत्र में 60 से अधिक घाटों पर अवैध खनन का पूरा नेटवर्क सक्रिय है
इस नेटवर्क में पुलिस और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की कथित संलिप्तता बताई जाती है
बिना स्थानीय संरक्षण के रात-दिन, मशीनों से खनन संभव ही नहीं
सूत्रों का दावा है कि—
“जांच से पहले ही खननकर्ताओं को सूचना दे दी जाती है, ताकि घाट खाली मिलें और सब कुछ कागजों में सही दिखे।”
यही कारण है कि एनजीटी जांच के दिन खनन पूरी तरह बंद मिला, जिसने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
करोड़ों का अवैध मुनाफा, सरकार के राजस्व पर डाका
यह मामला सिर्फ पर्यावरण या नदी का नहीं है—यह प्रदेश सरकार के राजस्व की सीधी लूट का भी है।
सूत्रों के अनुसार—
अवैध खनन से हर माह करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया जा रहा है
रॉयल्टी, परमिट, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति—सबकी खुलेआम चोरी
इससे प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हो रही है
ग्रामीणों का सवाल है—
“जब सरकार को नुकसान हो रहा है, तो प्रशासन किसके हित में आंखें मूंदे बैठा है?”
ग्रामीणों की जान खतरे में, यमुना को बनाया जा रहा मौत का रास्ता
विशेषज्ञों और ग्रामीणों की चेतावनी है कि—
यमुना की धार बदली जा रही है
नदी तल खतरनाक स्तर तक गहरा हो चुका है
कटाव बढ़ने से गांवों के अस्तित्व पर खतरा
बाढ़ की स्थिति में बड़े हादसे से इनकार नहीं
दो वर्ष पूर्व इसी क्षेत्र में हुए कटाव को लोग अब भी नहीं भूले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी नहीं रोका गया, तो अगली त्रासदी तय है।
एनजीटी का सख्त संदेश: अब जवाबदेही तय होगी
एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि, पुलिस आयुक्त और जिला खनन अधिकारी शपथपत्र पर जवाब देंगे
रिपोर्ट नहीं आई तो व्यक्तिगत पेशी होगी
सभी अभिलेखों के साथ अगली सुनवाई में उपस्थित होना अनिवार्य
29 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई
यह तारीख केवल सुनवाई नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की परीक्षा होगी।
अब सवाल सिर्फ अवैध खनन का नहीं है—
सवाल है ग्रामीणों की सुरक्षा का, यमुना के भविष्य का और प्रदेश सरकार के खजाने की रक्षा का।
एनजीटी का यह आदेश संकेत देता है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदार अफसरों पर सीधी गाज गिर सकती है।
