आस्था के नाम पर लापरवाही! अगरौला की गलियों में छुट्टा गोवंश बना ग्रामीणों के लिए मुसीबत
दुर्घटनाओं का खतरा, घरों में घुस रहे सांड-गोवंश, गोबर से पटी गलियां; गौशाला भेजने के नियमों के पालन पर उठे सवाल
रविन्द्र बंसल
लोनी। लोनी नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव अगरौला में छुट्टा गोवंश और सांडों की बढ़ती संख्या ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। गांव की गलियों, मुख्य मार्गों और आवासीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश खुलेआम घूम रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इनकी वजह से कई बार सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों के अनुसार, छुट्टा सांड और गोवंश आए दिन घरों के भीतर तक घुस जाते हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भय के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। कई बार सांडों के आपसी संघर्ष के दौरान राहगीरों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ता है। रात के समय स्थिति और भी अधिक भयावह हो जाती है।
समस्या केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। गांव की गलियां और सड़कें गोबर से अटी रहती हैं, जिससे दुर्गंध फैलती है और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई व्यवस्था भी इस कारण प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि समस्या के लिए केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि कुछ पशुपालक भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। आरोप है कि कई लोग अपने दुधारू पशुओं का दूध निकालने के बाद उन्हें चारा-पानी की समुचित व्यवस्था करने के बजाय पूरे दिन के लिए खुला छोड़ देते हैं। ये पशु गांव की गलियों, सड़कों और खेतों में भटकते रहते हैं तथा शाम को स्वयं अपने घर लौट आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे पशुपालकों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि उनकी लापरवाही का खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब उत्तर प्रदेश सरकार ने निराश्रित गोवंश को गौ-आश्रय स्थलों और गौशालाओं में रखने की व्यवस्था कर रखी है, तब फिर अगरौला की सड़कों और गलियों में इतनी बड़ी संख्या में छुट्टा गोवंश क्यों घूम रहे हैं। यदि नियमों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाए और पशुओं को खुला छोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए, तो इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
ग्रामीणों ने नगर पालिका, पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन से संयुक्त अभियान चलाकर गांव में घूम रहे सभी निराश्रित गोवंश और सांडों को गौशालाओं में पहुंचाने, पशुओं को खुला छोड़ने वाले लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने तथा नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार विभाग ग्रामीणों की इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान कब और कैसे करते हैं।
