अरावली मामले में फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
नई दिल्ली। अरावली पहाड़ियों में अवैध खनन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकारों को अवैध खनन रोकने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा देश के पर्यावरण भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसी के साथ अरावली क्षेत्र से संबंधित मुद्दों की समीक्षा और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किए जाने की बात भी कोर्ट ने दोहराई। इस समिति में पर्यावरण, वैज्ञानिक और खनन विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने पक्षकारों से ऐसे लोगों के नाम का सुझाव मांगा है।
इससे पहले 29 दिसंबर को इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर वाले अपने ही पूर्व आदेश पर स्टे लगा दिया था। अदालत ने 20 नवंबर 2025 के आदेश में कहा था कि किसी इलाके में वही भू-आकृति अरावली पहाड़ी मानी जाएगी, जिसकी ऊंचाई आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर ज्यादा हो। इसके साथ ही 500 मीटर के दायरे में मौजूद ऐसी पहाड़ियों के समूह को ही अरावली रेंज माना जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पर आपत्ति जताई थी।
इसमें कहा गया कि इस आदेश की वजह से अरावली क्षेत्र की लगभग 90 प्रतिशत छोटी पहाड़ियां कानूनी सुरक्षा से बाहर हो सकती हैं। ऐसा करने से इन क्षेत्रों में वन संरक्षण कानून लागू नहीं होगा जिस कारण अवैध खनन बढ़ जाएगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि आदेश की कुछ टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किए किया जा रहा है और इसलिए इसकी स्पष्टता जरूरी है। अब चार सप्ताह बाद इस केस की सुनवाई होगी। बता दें कि 24 दिसंबर को केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश में अरावली पहाड़ियों में नए खनन पट्टे दिए जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
