‘पार्टी में नजरंदाज किए जाने से मुस्लिम नेताओं ने छोड़ी पार्टी’, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी आरोप लगाकर बोले- आलाकमान से भी मिलना मुश्किल
नई दिल्ली। कांग्रेस से क्या मुस्लिमों का मोहभंग हो रहा है? आखिर कांग्रेस को मुस्लिम नेता छोड़ क्यों रहे हैं? दरअसल, बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने पहले पार्टी से किनारा किया। उसके बाद शनिवार को यूपी कांग्रेस से नसीमुद्दीन सिद्दीकी अलग हो गए। नसीमुद्दीन सिद्दीकी मायावती की सरकार में कद्दावर मंत्री थे। दोनों मुस्लिम नेताओं के पार्टी छोड़ने पर कांग्रेस के नेता राशिद अल्वी ने अब बयान दिया है। राशिद अल्वी ने कहा कि कांग्रेस में बड़े नेताओं से मिलना आम तौर पर मुश्किल होता है। अगर लोग अपनी चिंता जाहिर करना चाहते हैं, तो वे कहां जाएं?
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने पार्टी में कम्युनिकेशन गैप होने की भी संगीन बात कही। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग शिकायत करते हैं कि कांग्रेस में हाईकमान से मिलना आसान नहीं है। राशिद अल्वी ने कहा कि कई मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस छोड़ी, लेकिन वे बीजेपी में शामिल नहीं हुए। वे सत्ता के लिए नहीं गए। जबकि, कांग्रेस को जिन गैर मुस्लिम नेताओं ने छोड़ा, वे सभी बीजेपी में शामिल हुए। राशिद अल्वी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस इसलिए छोड़ी, क्योंकि कांग्रेस ने मुस्लिम नेतृत्व को नजरअंदाज किया। उन्होंने कांग्रेस और दूसरे सेक्युलर पार्टियों को सलाह दी कि अगर मुस्लिम नेतृत्व को नजरंदाज किया, तो असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता उभरते और ताकतवर बनते रहेंगे।
कांग्रेस से तमाम बड़े नेता लगातार बाहर जाते रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद जैसे कांग्रेस के युवा नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में गए और केंद्रीय मंत्री बने। वहीं, अब मुस्लिम नेता भी कांग्रेस से दूरी बना रहे हैं। ऐसे में राशिद अल्वी का बयान साफ करता है कि कांग्रेस में जो भी मुस्लिम समुदाय के नेता हैं, उनमें आलाकमान के तौर-तरीकों को लेकर बहुत नाराजगी है। जबकि, राहुल गांधी और प्रियंका गांडी वाड्रा मुस्लिम लीग जैसे दल के समर्थन से वायनाड से चुनकर लोकसभा पहुंचे। एक दौर में मुस्लिम समाज कांग्रेस को भर-भरकर वोट देता रहा, लेकिन अब मुस्लिम वोटरों की पसंद ओवैसी और समाजवादी पार्टी बन गए हैं। नतीजे में ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की दुर्गति वाली हालत है।
