लोक सेवक के खिलाफ शिकायत करनी है तो देना होगा हलफनामा, झूठी शिकायतें रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश
नई दिल्ली। किसी भी लोकसेवक के खिलाफ शिकायत करनी है, तो अब साथ में हलफनामा देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के बाद ये आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने मंगलवार को कहा कि भ्रष्टाचार और झूठे आरोपों पर लगाम लगाने के लिए शिकायत के साथ हलफनामा लिया जाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने न्यायिक अधिकारियों और लोक सेवकों के लिए एक जैसा मानक होने के फैसले में चीफ जस्टिस की ओर से सभी हाईकोर्ट को भेजे गए निर्देश का हवाला दिया।
चीफ जस्टिस की ओर से सभी हाईकोर्ट को भेजे निर्देश में कहा गया था कि न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों को उस वक्त तक नहीं लिया जाना चाहिए, जब तक कि उनके साथ हलफनामा न हो। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ आरोपों की तस्दीक संबंधी हलफनामा जरूरी है, तो लोक सेवकों के मामले में भी ऐसा ही करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हलफनामा के बारे में भेदभाव का तर्कसंगत आधार उसे नहीं दिखता। हलफनामा का मतलब है झूठी या परेशान करने वाली शिकायतों को छांटना और लोक सेवकों को कानून के दायरे में लाने और उनको न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग से बचाने के बीच संतुलन बनाना है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ किया कि बीएनएस की धारा 175(3) के तहत किसी भी अर्जी को मजिस्ट्रेट खारिज कर सकता है। इसके लिए शर्त है कि आरोप पूरी तरह निराधार, साफ तौर पर बेतुके और इतने असंभव हों कि कोई भी तर्कसंगत शख्स ये फैसला न कर सके कि कोई अपराध हुआ है। बेंच ने साथ ही कहा कि ऐसी शिकायतों को खारिज करने का आदेश ठोस और वैध कारणों के साथ हो। बीएनएस की धारा 175 मजिस्ट्रेट के आदेश बिना ही पुलिस को संज्ञेय मामलों की जांच की ताकत देता है। केरल में महिला की ओर से कथित यौन शोषण मामले में तीन पुलिस अफसरों के खिलाफ केस दर्ज कराने से ये मामला संबंधित था।
