भारत-यूरोपीय यूनियन व्यापार समझौते पर भड़का अमेरिका, वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट बोले- यूक्रेन के लोगों की जगह अपना आर्थिक हित देखा
वॉशिंगटन। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार समझौता तय होने पर अमेरिका भड़क गया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि यूरोपीय देशों ने यूक्रेन के लोगों की सुरक्षा के बारे में चिंता छोड़ कारोबारी मुनाफे को महत्व दिया। अमेरिका के वित्त सचिव बेसेंट ने कहा कि यूक्रेन में जारी भयानक जंग के बावजूद यूरोप ने अपने आर्थिक हितों को देखा। इससे उनको गहरी निराशा हुई है। स्कॉट बेसेंट का ये बयान इसलिए खास है, क्योंकि तमाम कोशिश और टैरिफ लगाने के बावजूद अमेरिका अब तक भारत से व्यापार समझौता नहीं कर सका है।
स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच समझौते से साफ है कि यूरोप के देशों ने 2025 में भारत पर ज्यादा कर लगाने के अमेरिका के फैसले का समर्थन क्यों नहीं किया था। अमेरिका के वित्त सचिव ने यूरोपीय देशों पर ये आरोप भी लगाया कि वे रूस को पैसा पहुंचा रहे हैं। बेसेंट ने कहा कि रूस से कच्चा तेल भारत जाता है। वहां से रिफाइन कर इसे यूरोप में बेचा जाता है। इस तरह अनजाने में ही यूरोप अपने ही खिलाफ युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। ट्रंप प्रशासन के वित्त सचिव ने कहा कि इसी वजह से भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने रूस और यूक्रेन की जंग खत्म कराने के लिए यूरोप से ज्यादा कोशिश की और ज्यादा बलिदान दिया।
बीती 27 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी और यूरोपीय कमीशन की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयन ने दिल्ली में साझा बयान देते हुए कहा था कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार समझौता तय हो गया है। दोनों पक्षों ने कहा कि कुछ प्रक्रिया तय होने के बाद इस साल के अंत तक भारत और यूरोपीय यूनियन व्यापार समझौते पर दस्तखत करेंगे। इस व्यापार समझौते के तहत 96.6 फीसदी चीजों पर आयात शुल्क या तो कम होगा या खत्म किया जाएगा। यूरोप की कंपनियों को इससे करीब चार अरब यूरो की बचत होगी। साथ ही भारत और यूरोपीय देशों के बीच कारोबार दोगुना हो सकेगा।
