अविश्वास विश्वास पर फैसला आने तक लोकसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे स्पीकर ओम बिरला
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने फैसला किया है कि विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जब तक फैसला नहीं आ जाता वो स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे और सदन की कार्यवाही से दूर रहेंगे। हालांकि नियमानुसार ऐसी कोई बाध्यता नहीं है मगर यह ओम बिरला का खुद का निर्णय है। इससे पहले स्पीकर ओम बिरला ने हाउस सेक्रेटरी-जनरल को उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नोटिस की जांच करने और उसके अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। बजट सत्र के दूसरे हिस्से के पहले दिन 9 मार्च को लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, डीएमके और वामदलों समेत विपक्षी पार्टियों के 118 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर साइन किए हैं। मंगलवार सुबह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई, मोहम्मद जावेद और सुरेश कोडिकुन्निल ने लोकसभा महासचिव को ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा। हालांकि राहुल गांधी ने प्रस्ताव पर साइन नहीं किए है और इसकी वजह बताते हुए कांग्रेस ने कहा है कि संसदीय लोकतंत्र में स्पीकर को हटाए जाने के प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष का हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना जाता है।
विपक्ष ने ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि ओम बिरला किसी भी विपक्षी सांसद को सदन में बोलने नहीं देते इस तरह से वो विपक्ष की आवाज को दबाना चाहते हैं। लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाए गए नो-कॉन्फिडेंस मोशन नोटिस में विपक्ष ने चार प्रमुख घटनाओं का जिक्र है। इसमें राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान बोलने से रोके जाने, विपक्ष के आठ सांसदों का बजट सत्र से निलंबन, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी के अलावा लोकसभा स्पीकर के उस बयान को भी उठाया गया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था।
