निकोबार प्रोजेक्ट को एनजीटी ने दी मंजूरी, कांग्रेस और कई पर्यावरण कार्यकर्ता करते रहे हैं विरोध
नई दिल्ली। ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल समेत बड़े प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी ने मंजूरी दे दी है। एनजीटी के कोलकाता स्थित पूर्वी जोनल बेंच ने सोमवार को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को मंजूरी दी और इस बारे में कहा कि प्रोजेक्ट के लिए पहले ही दी गई पर्यावरण संबंधी मंजूरी में तमाम सुरक्षा उपाय किए गए हैं। इस वजह से हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
ग्रेट निकोबार द्वीप प्रोजेक्ट में अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनेगा। यानी यहां एक जहाज से दूसरे जहाज में कंटेनर को ट्रांसफर करने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा यहां एयरपोर्ट और टाउनशिप भी बनाई जानी है। इसके अलावा 450 एमवीए का गैस और सोलर पावर प्लांट भी ग्रेट निकोबार में बनाया जाना है। प्रोजेक्ट के लिए करीब 10 लाख पेड़ों को काटना होगा। पेड़ों की कटान और पर्यावरण को और भी बड़ा नुकसान होने का दावा कर कांग्रेस के कुछ नेता और पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का विरोध करते रहे हैं। उनका आरोप है कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से समुद्री पर्यावरण को नुकसान होगा। जबकि, भारत के लिए रणनीतिक तौर पर ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को पूरा करना जरूरी है।
एनजीटी ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट संबंधी पहले दौर की सुनवाई के दौरान पर्यावरण संबंधी मंजूरी के मामले में दखल देने से साफ इनकार किया था। एनजीटी ने माना है कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट राष्ट्रीय और सामरिक नजरिए से अहम है। एनजीटी ने कहा है कि पर्यावरण की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। एनजीटी ने कहा है कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के पर्यावरण संबंधी मंजूरी में खास तौर पर लेदरबैक समुद्री कछुए के संरक्षण, निकोबार मेगापॉड पक्षी के संरक्षण, खारे पानी के मगरमच्छ के संरक्षण, निकोबार मकॉक और रॉबर केकड़े के संरक्षण, मैंग्रोव को दूसरी जगह शिफ्ट करने, मूंगा की चट्टानों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के साथ ही वहां बसने वाले शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के हितों की रक्षा की गई है। एनजीटी ने आदेश दिया है कि प्रोजेक्ट के लिए तटरेखा में कटाव या बदलाव न किया जाए। साथ ही समुद्र तट भी सुरक्षित रहें।
