‘सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों के सीएम के बयान वाली याचिका सिलेक्टिव’, हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट से कपिल सिब्बल को झटका
नई दिल्ली। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल को सुप्रीम कोर्ट में झटका लग गया। दरअसल, हेट स्पीच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी। इस याचिका में बीजेपी शासित असम, यूपी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के बयानों का ही हवाला दिया गया था। याचिका में बीजेपी शासित राज्यों के सीएम का मामला ही होने पर सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इसे सुनने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि ये सिलेक्टिव है। कोर्ट ने कहा कि संविधान की रक्षा सिर्फ चंद चेहरों को कटघरे में खड़ा कर नहीं, हर पार्टी की मानसिकता को बदलकर ही की जा सकती है।
कपिल सिब्बल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मामला सिर्फ भाषणों का नहीं रहा। उस जहरीले माहौल का है, जो सोशल मीडिया से सड़क तक लोकतंत्र की गरिमा को चुनौती दे रहा है। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कपिल सिब्बल से कहा कि कोर्ट निष्पक्ष और व्यापक याचिकाओं का स्वागत करता है। सिर्फ चुनिंदा लोगों और एक ही विचारधारा के नेताओं को निशाने पर लेना न्याय के हिसाब से ठीक नहीं। कोर्ट ने कपिल सिब्बल से कहा कि याचिका को संशोधित करें, ताकि ये खास व्यक्ति की जगह सभी राजनीतिक दलों के लिए संवैधानिक सबक बन सके। बेंच की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जयमाल्य बागची ने कहा कि सोच पर भाषण आधारित होते हैं। जब तक संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ जाने वाली सोच नहीं मिटाई जाएगी, तब तक दिशानिर्देश बनाने से कुछ नहीं होने वाला।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कपिल सिब्बल की दलील मानी की माहौल जहरीला हो रहा है। साथ ही सिब्बल की ये बात भी कोर्ट ने मानी कि सोशल मीडिया की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि इसे लोकलुभावन अभ्यास की जगह गंभीर संवैधानिक अभ्यास बनाना होगा। याचिका में असम के सीएम के मियां मुस्लिम, यूपी के सीएम के उर्दू समर्थकों पर बयान और उत्तराखंड के सीएम के लैंड और लव जिहाद जैसे शब्दों का उदाहरण दिया गया था। कपिल सिब्बल ने कोर्ट में ये भी कहा कि जब चुनाव आचार संहिता लागू नहीं होती, तो उस वक्त सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली नफरत पर मीडिया की क्या जिम्मेदारी होनी चाहिए। कोर्ट की ओर से याचिका में बदलाव के लिए कहे जाने पर कपिल सिब्बल ने वक्त मांगा। अब वो सभी पार्टियों के लिए जवाबदेही और संवैधानिक नैतिकता की मांग वाली याचिका दाखिल करेंगे।
