महाराष्ट्र में मुस्लिमों के कुछ वर्गों को मिल रहा पांच फीसदी आरक्षण रद्द, देवेंद्र फडणवीस सरकार के फैसले पर कांग्रेस ने जताया विरोध
मुंबई। महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस ने मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को दिए गए पांच फीसदी आरक्षण को रद्द कर दिया है। फडणवीस सरकार ने मंगलवार रात इस बारे में आदेश जारी किया। मुस्लिमों के इन वर्गों को साल 2014 से सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ा वर्ग के तहत पांच फीसदी आरक्षण दिया जा रहा था। महाराष्ट्र सरकार का ताजा फैसला कोर्ट के फैसले और कानूनी स्थिति के आधार पर लिया गया। महाराष्ट्र कांग्रेस की नेता और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने इस फैसले का विरोध किया है।
फडणवीस सरकार ने आदेश में कहा है कि साल 2014 में जिन सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़े मुस्लिम समूहों को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए के तहत आरक्षण दिया गया था, उसे अब खत्म माना जाएगा। सरकार के ताजा फैसले से सरकारी और अर्ध सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों के इन वर्गों की सीधी भर्ती और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश देने में मिलने वाले फायदे खत्म हो गए हैं। मुस्लिमों के इन वर्गों को आरक्षण देने की नीति जुलाई 2014 में महाराष्ट्र की तत्कालीन सरकार के कल्याण मंत्री नसीम खान के प्रस्ताव पर लागू हुई थी। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को जाति प्रमाण पत्र और वैधता प्रमाण पत्र भी जारी करने के निर्देश दिए गए थे। महाराष्ट्र की तत्कालीन सरकार के फैसले को उसी साल बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि जिस अध्यादेश से मुस्लिमों के कुछ वर्गों को आरक्षण दिया गया, वो कभी कानून नहीं बना। अध्यादेश की अवधि खत्म होने के साथ ही उससे संबंधित सभी सरकारी आदेश खुद ही अमान्य हो गए। इस कानूनी स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने साल 2014 और 2015 में जारी इससे जुड़े आदेशों को रद्द कर दिया है। महाराष्ट्र का ये फैसला सिर्फ कोर्ट समर्थित कानूनी स्थिति के मुताबिक रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए जारी हुआ है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की और 14 नवंबर 2014 को अंतरिम आदेश जारी कर इस आरक्षण पर रोक लगा दी। जिसके बाद से कोर्ट में मामला चलता रहा और मुस्लिम आरक्षण पर कानूनी स्थिति साफ नहीं हो सकी।
