इंडी गठबंधन के घटक दल कांग्रेस पर उठाने लगे सवाल!, उद्धव ठाकरे के सामना अखबार में ममता बनर्जी या एमके स्टालिन को कमान सौंपने की मांग
मुंबई। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने ढोल-नगाड़ा पीटने के अंदाज में एकजुट होकर इंडी गठबंधन बनाया था। अब इसी इंडी गठबंधन के घटक दल सवाल उठाने लगे हैं। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना-यूबीटी ने अपने अखबार सामना में कहा है कि इंडी गठबंधन अब एक चौराहे पर खड़ा है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन का नाम लेते हुए सामना के संपादकीय में कहा गया है कि अब इंडी गठबंधन को आंतरिक बहस से आगे बढ़कर तय करना होगा कि इनमें से कौन या कोई अन्य राष्ट्रीय संकट में उसका नेतृत्व करेगा या नहीं। सामना में कहा गया है कि क्षेत्र के अहम चुनावों से पहले कांग्रेस और इंडी गठबंधन के भीतर कलह और नेतृत्व को लेकर चल रही बहस एकता को कमजोर करने की धमकी दे रही हैं।
बीते दिनों मणिशंकर अय्यर और पीएम मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने इंडी गठबंधन की कमान ममता बनर्जी को सौंपने की सलाह दी थी। दोनों की फोटो लगाते हुए सामना के संपादकीय में कहा गया है कि इंडी गठबंधन के भीतर आपसी मतभेद और झगड़े बढ़ रहे हैं। इसमें कहा गया है कि राज्यों के होने वाले चुनाव से पहले इंडी गठबंधन में मतभेद विपक्षी एकता को कमजोर कर सकतीहै। उद्धव ठाकरे के अखबार सामना के संपादकीय में इंडी के भीतर मची रार को ‘फ्रेंडली फायर’ बताया गया है। फ्रेंडली फायर का मतलब होता है कि जब साथी ही एक-दूसरे पर हमला करने लगें। सामना में कहा गया है कि राज्यों में इंडी गठबंधन के घटक दल एक-दूसरे के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर पश्चिम बंगाल में टीएमसी और कांग्रेस व केरल में वामदलों और कांग्रेस के बीच टक्कर बताई गई है।
सामना के संपादकीय में ये भी कहा गया है कि महाराष्ट्र में इंडी गठबंधन के घटक दलों में स्थानीय विभाजन से बीजेपी को फायदा हुआ है। उद्धव ठाकरे के अखबार का कहना है कि संसद में होने वाला हंगामा अलग है, लेकिन आम जनता की सोच बदल रही है। ऐसे में इंडी गठबंधन को जल्द फैसला लेना होगा कि उनका नेतृत्व कौन करेगा। कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद के बारे में सामना में कहा गया है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की राय अलग-अलग है। इससे कांग्रेस की एकजुटता पर असर पड़ा है। हालांकि, उद्धव ठाकरे के अखबार ने राहुल गांधी की लड़ाई की भावना की तारीफ की है। सामना में लिखा है कि सरकार धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर रही है। इससे लोगों की सोच प्रभावित हो रही है। जिसके कारण विपक्ष को जवाब देने के लिए मजबूत नेतृत्व चाहिए। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में कई जगह इंडी गठबंधन के बीच ही मुकाबला हुआ था। महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में भी इंडी गठबंधन साथ नहीं लड़ा।
