जहां, जिससे संभव होगा…ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए खुले हैं सभी विकल्प, विदेश मंत्रालय ने एलपीजी पर क्लियर किया स्टैंड
नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गैस और अन्य ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर सरकार का स्टैंड क्लियर किया है। उन्होंने बताया कि जहां भी संभव हो, सभी उपलब्ध स्रोतों से एलपीजी प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। क्या भारत रूस से एलपीजी खरीद रहा है इस पर उन्होंने जवाब दिया कि यदि रूस से एलपीजी उपलब्ध है, तो हम उस विकल्प पर भी विचार करेंगे। स्थिति ऐसी है कि हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे लोगों की ईंधन संबंधी जरूरतें हर तरह से पूरी हों। साथ ही, मैं यह भी कहना चाहता हूं कि ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति के लिए हमने कई विकल्प खुले रखे हैं।
जायसवाल ने हालांकि इस बात को स्वीकार किया कि युद्ध की वजह से शिपिंग मार्गों पर असर पड़ा है और इसलिए ऊर्जा आपूर्ति चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि एलपीजी की आपूर्ति को लेकर सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही है। घरेलू उपभोक्ताओं की आपूर्ति के बाद वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को आपूर्ति कैसे सुनिश्चित करें, इस पर विचार किया जाएगा। एलएनजी के संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण यह पहले से ही प्रभावित है। हालांकि, हम कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं। हम सभी हितधारकों के संपर्क में हैं ताकि हम अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करने और अपने माल के निर्बाध पारगमन को सुनिश्चित करने के सर्वोत्तम तरीके खोज सकें।
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट पर जायसवाल ने कहा, हमने कई बयान जारी किए हैं जिनमें हमने अपना रुख, अपनी स्थिति और इस मुद्दे पर अपनी राय स्पष्ट की है। हमने संयम बरतने का, तनाव कम करने का और कूटनीति के माध्यम से बातचीत का आह्वान किया है ताकि इस संघर्ष का जल्द से जल्द अंत हो सके। वहीं ईरान के चाबहार पोर्ट पर भारत की स्थिति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, चाबहार के संबंध में, मैंने पहले भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की थी जोकि मैं फिर से दोहराना चाहूंगा। अमेरिकी पक्ष ने चाबहार बंदरगाह के लिए सशर्त प्रतिबंध छूट को 26 अप्रैल, 2026 तक बढ़ाया है। सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों को समझने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रही है। यही हमारी स्थिति है।
