कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत पर रोक लगाई
नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को झटका दिया। सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार की याचिका पर सुनवाई के बाद पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अंतरिम ट्रांजिट जमानत के आदेश पर रोक लगा दी। तेलंगाना हाईकोर्ट में पवन खेड़ा ने अंतरिम ट्रांजिट जमानत याचिका दाखिल की थी। वहां से कांग्रेस प्रवक्ता को राहत मिलने के खिलाफ असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में असम सरकार ने दलील दी कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं। उनको अंतरिम ट्रांजिट जमानत की राहत नहीं मिलनी चाहिए। असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जब कथित अपराध असम में हुआ और एफआईआर भी वहीं की गई है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने जमानत क्यों दी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पवन खेड़ा को असम हाईकोर्ट जाना चाहिए था। किसी दूसरे राज्य के हाईकोर्ट से राहत लेने को उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया। वहीं, पवन खेड़ा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अवधि बढ़ाने की अपील की। असम सरकार की दलील पर गौर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत वाले तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को स्टे कर दिया।
पवन खेड़ा ने बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए थे। पवन खेड़ा ने दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया था कि रिनिकी के पास दो देशों के पासपोर्ट और यूएई का गोल्डन वीजा है। असम के सीएम ने पवन खेड़ा के दावों को झूठ बताया था। इसके बाद हिमंत की पत्नी रिनिकी ने पवन खेड़ा के खिलाफ फर्जी दस्तावेज की एफआईआर की थी। असम पुलिस जब दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के घर पहुंची, तो वो नहीं मिले। वो हैदराबाद चले गए थे। असम पुलिस ने दावा किया है कि पवन खेड़ा के घर से उसे आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं।
