पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत, जांच में करना होगा सहयोग, बिना इजाजत विदेश जाने पर रोक
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी को स्वीकार कर लिया है। इससे पहले जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह मामला पवन खेड़ा के द्वारा असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा हुआ है। पवन खेड़ा ने रिंकी भुइयां के पास तीन पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति होने का दावा किया था जिसके बाद रिंकी भुइयां ने असम पुलिस में पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया पवन खेड़ा के रिंकी भुइयां पर लगाए आरोप और खेड़ा पर दर्ज एफआईआर, दोनों ही राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का नतीजा लगते हैं। खेड़ा को अग्रिम जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनको जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। खेड़ा को जब भी पुलिस स्टेशन में बुलाया जाए, उनको उपस्थित रहना पड़ेगा। वो किसी भी प्रकार से सबूतों को प्रभावित नहीं करेंगे। पवन खेड़ा कोर्ट की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट बेंच ने ट्रायल कोर्ट को जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शर्तें भी लागू करने का अधिकार भी दिया है। इससे पहले 24 अप्रैल को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उन्होंने राजनीतिक लाभ उठाने के लिए एक निर्दोष महिला को विवाद में घसीटा, यह केवल मानहानि का मामला नहीं है, इसलिए उनको हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है।
पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद असम पुलिस दिल्ली स्थित उनके घर पहुंची थी मगर वो वहां नहीं मिले थे। इसके बाद खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी जहां से उनको अग्रिम जमानत मिल गई थी। असम पुलिस ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसके बाद शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के अग्रिम जमानत वाले आदेश को रद्द कर दिया था और पवन खेड़ा को असम की अदालत में अपील करने को कहा था।
