डॉक्टर के पर्चे के बिना अब नहीं मिलेगा कोई सिरप, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा बिक्री नियमों में किया बदलाव
नई दिल्ली। अब कोई भी सिरप बिना डॉक्टर के पर्चे के मेडिकल स्टोर पर नहीं मिलेगा। पिछले साल खांसी के सिरप में मिलावट के चलते मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई कई बच्चों की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने दवा बिक्री के नियमों में संशोधन किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार अब कप सिरप या अन्य किसी बीमारी के इलाज में उपयोग होने वाले सिरप को लेने के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन दिखाना अनिवार्य होगा। आम जनता के सुझावों पर विचार के बाद यह फैसला लिया गया है।
‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में संशोधन करते हुए सरकार ने ‘ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026’ की घोषणा की है। 1945 के शेड्यूल ‘K’ में सूचीबद्ध दवाओं की श्रेणी से ‘सिरप’ शब्द को हटा दिया है। इसके चलते कोई भी सिरप अब ओवर-द-काउंटर दवाओं की श्रेणी में नहीं रहेंगे। नए नियम के बाद बिना डॉक्टरी पर्चे के सिरप बेचने पर सख्त कार्रवाई होगी और ऐसे दवा विक्रेताओं का लाइसेंस भी रद्द कर किया जा सकता है। आपको बता दें कि शेड्यूल ‘K’ में कुछ खास तरह की दवाओं को डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना भी मेडिकल स्टोर पर बेचा जा सकता है। इनको ही ओवर-द-काउंटर दवा कहते हैं।
आपको बता दें कि पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से कई बच्चों की मौत का मामला सामने आया था। इन कप सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) या एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) जैसे खतरनाक केमिकल होने की बात कही जा रही थी। सरकार ने ऐसे सभी सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने एडवाइजरी जारी की थी जिसमें यह कहा गया था कि 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवाएं न दी जाएं। 5 साथ ही यह भी कहा गया है कि 5 साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप देने से पहले डॉक्टर को दिखाना जरूरी है और चिकित्सक की निगरानी में ही उचित खुराक दी जानी चाहिए।
