May 13, 2026

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मुरथल ढाबे पर बम ब्लास्ट, मंदिर में भी रखे जाते RDX! दिल्ली को जला डालने की ISI की बड़ी साजिश

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने एक बड़े ऑपरेशन में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और शहज़ाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े एक खतरनाक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। गिरफ्तार किए गए 9 संदिग्धों से पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आतंकियों की हिट लिस्ट में दिल्ली के धार्मिक स्थलों से लेकर हाईवे के व्यस्त ढाबे तक शामिल थे। जांचकर्ताओं ने बताया है कि दिल्ली का एक ऐतिहासिक मंदिर पाकिस्तान समर्थित इस मॉड्यूल के मुख्य निशानों में से एक था। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों में से एक ने मंदिर की रेकी की थी और उस जगह की तस्वीरें पाकिस्तान में बैठे सोशल मीडिया हैंडलर्स के साथ शेयर की थीं। आरोप है कि इस आतंकी साज़िश में धार्मिक स्थल को निशाना बनाने से पहले, मंदिर पर तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों पर गोलीबारी करने की योजना शामिल थी।

सूत्रों ने आगे बताया कि दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक मशहूर ढाबा भी उनकी हिट लिस्ट में था। आरोप है कि इस ढाबे पर, जहां हर दिन हज़ारों लोग आते हैं, बड़े पैमाने पर तबाही मचाने और दहशत फैलाने के इरादे से हथगोले (हैंड ग्रेनेड) से हमला करने की योजना थी।

हरियाणा के सोनीपत ज़िले में स्थित मुरथल, दिल्ली से पंजाब के अमृतसर तक फैले नेशनल हाईवे-44 पर मौजूद मशहूर ढाबों का केंद्र है। इन ढाबों पर दिन-रात हज़ारों लोग आते-जाते रहते हैं।

खबरों के मुताबिक, हिसार में स्थित एक सैन्य शिविर भी ISI से जुड़े इस मॉड्यूल के निशाने पर था। आरोप है कि शिविर की रेकी के वीडियो पाकिस्तान से काम कर रहे हैंडलर्स को भेजे गए थे।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के कुछ पुलिस थानों में तैनात पुलिसकर्मी भी इस आतंकी नेटवर्क के निशाने पर थे। ये खुलासे गुरुवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा दिल्ली और कई अन्य राज्यों से शहज़ाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 9 गुर्गों को गिरफ़्तार किए जाने के एक दिन बाद हुए। इस ऑपरेशन के दौरान भारी मात्रा में हथियार और आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई।

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने ISIS से जुड़ी एक साज़िश में कथित भूमिका निभाने के आरोप में 3 आरोपियों (जिनमें एक डॉक्टर भी शामिल है) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। आरोप है कि ये लोग सार्वजनिक स्थानों पर एक जानलेवा जैविक ज़हर (बायोलॉजिकल टॉक्सिन) का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर ज़हर फैलाने की साज़िश रच रहे थे।

आरोपियों—हैदराबाद के रहने वाले डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन और उत्तर प्रदेश के रहने वाले आज़ाद और मोहम्मद सुहेल—के खिलाफ गुजरात के अहमदाबाद स्थित NIA की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है। NIA के अनुसार, ये तीनों विदेश में बैठे ISIS के हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे। इन्होंने मिलकर एक सुनियोजित तरीके से ऐसे कमज़ोर और कट्टरपंथी युवाओं को भर्ती किया, जो जिहाद का समर्थन कर सकें और प्रतिबंधित हथियारों व बायोटेररिज्म (जैविक आतंकवाद) का इस्तेमाल करके दहशत फैला सकें।

जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपियों ने अपनी आतंकी साज़िश को अंजाम देने के लिए ‘रिसिन’ (Ricin) का इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी। रिसिन अरंडी के बीजों से निकाला जाने वाला एक बेहद ज़हरीला पदार्थ है। अपने जानलेवा स्वभाव के कारण, रिसिन को ‘केमिकल वेपन्स कन्वेंशन’ (रासायनिक हथियार संधि) की ‘अनुसूची I’ के तहत वर्गीकृत किया गया है।

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