असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश, आदिवासी समाज को इसके दायरे से बाहर रखा गया
नई दिल्ली। असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने प्रदेश विधानसभा में आज समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर दिया है। प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, बिल, 2026 को सदन के पटल पर रखा। हालांकि विपक्ष की ओर से इस बिल का विरोध किया गया। इससे पहले कैबिनेट बैठक में इस बिल को विधानसभा में पेश किए जाने की मंजूरी मिल चुकी है। जबकि विपक्ष का कहना है कि यूसीसी बिल को विधानसभा में प्रस्तुत करने से पहले हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होनी जरूरी है।
यूसीसी विधेयक पर 27 मई को चर्चा होने की संभावना है। असम तीसरा ऐसा बीजेपी शासित राज्य बन गया है जहां सरकार ने समान नागरिक संहिता बिल पेश किया है। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात में इस विधेयक को पेश किया जा चुका है। असम सरकार ने हालांकि यूसीसी से आदिवासी समुदाय को बाहर रखा है। इस विधेयक को लाने के पीछे प्रमुख कारण बहुविवाह प्रथा पर पूर्ण रूप से रोक लगाना है। इसके अलावा शादी के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र का एक तय मानक लागू करना भी इस बिल को लाने की बड़ी वजह है।
यूसीसी लागू होने के बाद शादियों और तलाक का विवरण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना अनिवार्य होगा। पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार मिलेगा। और लिव इन में रहने वाले जोड़ों यानी कि बिना शादी के साथ रहने वाले कपल के लिए कड़े नियम और पंजीकरण अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि यूसीसी बिल से धार्मिक परम्पराओं को पूरी तरह से बाहर रखा गया है। इससे किसी धर्म की पूजा पद्धति में कोई दखल नहीं दिया जाएगा। यूसीसी विधेयक के मसौदे को असम की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया है।
