आसाराम की मुश्किल बढ़ी, उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा, तुरंत सरेंडर करने का आदेश
नई दिल्ली। आसाराम की उम्मीदों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने आसाराम पर लगी गैंगरेप और आपराधिक साजिश से संबंधित धारा तो हटा दी है लेकिन आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। इतना ही नहीं अदालत ने आसाराम को तुरंत सरेंडर करने का भी आदेश दिया है। आसाराम को फिलहाल मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत मिली हुई है। कोर्ट ने इस केस के सह-अभियुक्त शरद और शिल्पी को राहत देते हुए बरी कर दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने कहा कि जो सबूत हैं उनके आधार पर आसाराम पर गैंगरेप की धारा में दोष सिद्ध नहीं होता, हालांकि अन्य आरोप साबित होते हैं। बेंच ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आसाराम को जो आजीवन कारावास की सजा सुनाई है वो फैसला तर्कसंगत और सही है, उसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक इस मामले में लगातार सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
बता दें कि आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अभी दो दिन पहले ही 25 मई को राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने आसाराम की अंतरिम जमानत को बढ़ाए जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने आसाराम की अंतरिम जमानत को 7 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया था। मगर अब हाईकोर्ट ने तुरंत आत्मसमर्पण के लिए बोला है जिसके बाद आसाराम को फिर से सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा।
