टीएमसी सांसदों की बगावत से मोदी सरकार को बड़ा फायदा!, परिसीमन बिल पास कराना होगा आसान; समझिए लोकसभा और राज्यसभा का गणित
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में घोर पराजय के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी के विधायक और सांसदों ने बागी तेवर दिखाए हैं। इससे पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार की बांछें निश्चित तौर पर खिली हुई हैं। खासकर टीएमसी सांसदों की बगावत से मोदी सरकार के लिए परिसीमन बिल पास कराने का रास्ता आसान हो सकता है। इससे पहले लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण परिसीमन बिल पास नहीं हो सका था। परिसीमन बिल का महिला आरक्षण कानून से सीधा नाता है। अगर परिसीमन बिल पास हो जाता है, तो सरकार 2029 से महिला आरक्षण कानून को लागू कर संसद और विधानसभाओं में दो-तिहाई आरक्षण दे देगी।
पहले लोकसभा का संख्या बल देखते हैं। लोकसभा में तीन सीटें खाली हैं। इस तरह मोदी सरकार को दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों का साथ चाहिए। एनडीए के पास 293 सांसद हैं। अगर टीएमसी के 22 बागी सांसद साथ दें, तो एनडीए का आंकड़ा 315 हो जाएगा। कांग्रेस से नाराज डीएमके के 22 सांसद भी अगर समर्थन दें, तो परिसीमन बिल पास कराने के पक्ष में सांसदों की संख्या 337 हो जाएगी। अप्रैल में जब परिसीमन बिल आया था, तब मोदी सरकार को कुछ अतिरिक्त वोट मिले थे। अगर ये वोट फिर मिल गए, तो एनडीए के पक्ष में सांसदों की संख्या बढ़कर 348 होगी। फिर दो-तिहाई बहुमत के लिए और 12 सांसदों के वोट की जुगाड़ करनी होगी। जो बहुत मुश्किल नहीं है।
राज्यसभा की बात करें, तो वहां टीएमसी के 13 सांसद थे। अब सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से टीएमसी सांसदों की तादाद 12 हो गई है। अगर टीएमसी के कुछ और सांसद इस्तीफा दें, तो सरकार के लिए परिसीमन बिल पास कराने में आसानी होगी। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसदों का समर्थन चाहिए। राज्यसभा में एनडीए के सांसदों की संख्या 150 है। वहां डीएमके के 8 सांसद हैं। अन्य छोटे दलों के सांसदों को भी सरकार साथ ले लेती है, तो उसे परिसीमन बिल को राज्यसभा से पास कराने में भी सफलता मिल जाएगी। ऐसे में टीएमसी और डीएमके सांसदों के रुख पर सारा दारोमदार टिका हुआ है। बताया जा रहा है कि सरकार की तरफ से डीएमके और अन्य दलों से बात हो रही है। कुल मिलाकर संसद का मॉनसून सत्र गहमागहमी भरा होने के पूरे आसार हैं।
