मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप से किया इनकार, नामांकन रद्द होने को दी थी चुनौती
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया था मगर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन कैंसिल कर दिया था। मीनाक्षी नटराजन ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। नामांकन रद्द किए जाने के मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने मीनाक्षी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि कोई फैसला दिखाएं जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने नॉमिनेशन की प्रक्रिया के बाद रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को रद्द किया हो और नॉमिनेशन को मंजूरी दी हो।
सिंघवी ने जवाब दिया कि जब किसी मामले (जैसे कि इस मामले) में तथ्य सामने आएंगे, तो कोर्ट कानून लागू करेगा। इस पर अदालत ने कहा कि अगर उनकी याचिका को सुना गया तो यह अनुच्छेद 329 के परे होगा और इससे एक नई परंपरा की शुरुआत हो जाएगी कि नामांकन खारिज होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट केस की सुनवाई कर सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि फॉर्म 26 में नियमों के तहत आपराधिक मुकदमे की जानकारी देना अनिवार्य है। वहीं बीजेपी उम्मीदवार की ओर से कोर्ट में पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि नॉमिनेशन पेपर खारिज होने से किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता है, इसलिए संविधान के अनुच्छेद 32 (रिट अधिकार क्षेत्र) के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की जा सकती।
रोहतगी ने कहा कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया शुरू से अंत तक अनुच्छेद 32 और 226 के दायरे से बाहर है। उन्होंने आगे कहा कि नॉमिनेशन पेपर को गलत तरीके से खारिज किए जाने पर भी इसे केवल चुनाव ट्रिब्यूनल के समक्ष चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जानी चाहिए। वहीं मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है।
