शिवसेना-यूबीटी के 6 सांसदों ने अलग होकर एकनाथ शिंदे को समर्थन का एलान किया
नई दिल्ली। उद्धव ठाकरे को चार साल में दूसरा बड़ा झटका लगा है। 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव को झटका देकर शिवसेना और उसका चुनाव चिन्ह झटक लिया था। अब उद्धव ठाकरे की नई पार्टी शिवसेना-यूबीटी के भी 9 में से 6 सांसदों ने अलग होकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन करने की चिट्ठी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी है। न्यूज चैनल आजतक के मुताबिक जिन सांसदों ने उद्धव ठाकरे का दामन छोड़ा, वे हैं संजय देशमुख, संजय जाधव, नागेश पाटिल आष्टिकर, संजय दीना पाटिल, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमराजे निंबालकर।
चैनल की खबर में कहा गया है कि उद्धव की पार्टी के ये बागी सांसद बुधवार की सुबह मुंबई, पुणे और नांदेड़ से चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली पहुंचे। उनके साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना के वरिष्ठ नेता भी थे। सभी ने दिल्ली पहुंचकर उद्धव खेमे को छोड़ने और शिंदे की शिवसेना को समर्थन देने की चिट्ठी लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी। अब लोकसभा अध्यक्ष को फैसला लेना है कि उद्धव के सांसदों को शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की मंजूरी दी जाए या नहीं। ये फैसला भी आने वाले दिनों में लिए जाने की उम्मीद है। इससे पहले उद्धव के करीबी और शिवसेना-यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बागी सांसदों पर निशाना साधा था। उन्होंने बागियों को कसम भी दी थी कि वे उद्धव का साथ न छोड़ें, लेकिन संजय राउत के पैंतरे धरे रह गए।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना-यूबीटी के 6 सांसदों के बागी होने की अटकलें काफी दिनों से लग रही थीं। इन अटकलों के बाद उद्धव ने बीते दिनों अपने आवास पर सांसदों की बैठक बुलाई थी। तब खबर आई थी कि कई सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। हालांकि, संजय राउत ने उस वक्त दावा किया था कि बैठक में सभी सांसद या तो पहुंचे या वर्चुअली जुड़े थे। हालांकि, उद्धव ठाकरे ने भी शायद मान लिया था कि उनके सांसद टूटेंगे। इसी वजह से शिवसेना-यूबीटी संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी भेजकर कहा था कि सदन में सिर्फ उनकी पार्टी को ही अधिकृत राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता दी जाए। अरविंद सावंत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को भेजी चिट्ठी में कहा गया है कि अगर किसी अन्य गुट की ओर से विशेष दर्जे या मान्यता की मांग की जाए, तो उस पर फैसला लेने से पहले शिवसेना-यूबीटी को भी पक्ष रखने का मौका दिया जाए। उद्धव ठाकरे की पार्टी की ओर से चिट्ठी में लिखा गया है कि उसके पास संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत कानूनी प्रावधानों का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित है।
