आसाराम को नहीं मिली अंतरिम जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार का पक्ष जानने के लिए जारी किया नोटिस
नई दिल्ली। आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली और अंतरिम जमानत की मांग वाली आसाराम की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि राजस्थान सरकार का पक्ष सुने बिना आसाराम को जमानत नहीं दी जा सकती। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह में अपना पक्ष रखने को कहा है। बेंच ने कहा कि आसाराम प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनकी जमानत पर विचार करते हुए इस बात को भी ध्यान में रखना होगा।
आसाराम ने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की थी। इस पर बेंच ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को जेल में जो मेडिकल सेवाएं दी जा रही हैं उनको जारी रखी जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ गंभीर स्वास्थ्य की स्थिति में ही जमानत पर विचार किया जाएगा। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में आसाराम को 25 अप्रैल 2018 को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आसाराम ने सजा को निलंबित करने की मांग वाली याचिका राजस्थान हाईकोर्ट में दायर की थी। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने 27 मई 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए आसाराम पर लगी गैंगरेप और आपराधिक साजिश से संबंधित धारा तो हटा दी लेकिन आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आसाराम को जो आजीवन कारावास की सजा सुनाई है वो फैसला तर्कसंगत और सही है। हालांकि सबूतों के अभाव में हाईकोर्ट ने अन्य दो आरोपियों को बरी कर दिया था। जिस वक्त यह फैसला सुनाया गया आसाराम जमानत पर जेल से बाहर थे। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनको सरेंडर करना पड़ा था।
