‘कानूनी शर्त पूरी हो तो हत्या के आरोपी नाबालिग पर बालिग की तरह केस चल सकता है’, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि अगर कानून की शर्त पूरी होती है, तो हत्या के आरोपी नाबालिग पर बालिग की तरह केस चलाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जेजे एक्ट के तहत हत्या को जघन्य अपराध माना जाता है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने नाबालिग की ओर से दाखिल अपील को खारिज कर दिया। नाबालिग ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी। पटना हाईकोर्ट ने भी उस पर बालिग की तरह केस चलाने का फैसला सुनाया था।
आरोपी नाबालिग 16 साल का है। उस पर एक लड़के का गला रेतने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अपील खारिज करते हुए कहा कि आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या को जेजे एक्ट 2015 के तहत जघन्य अपराध के तौर पर देखने की जरूरत है। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि हत्या के मामले में जरूरी तौर पर उम्रकैद ही सबसे कम सजा है। क्योंकि अदालतें धारा 302 के तहत इससे कम सजा नहीं दे सकतीं। इस वजह से हत्या को जघन्य अपराध ही माना जाएगा। नाबालिग ने तर्क दिया था कि आईपीसी की धारा 302 के तहत मौत या उम्रकैद का प्रावधान है, लेकिन इस धारा में साफ तौर पर कम से कम का उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए हत्या को जघन्य नहीं, गंभीर अपराध माना जाना चाहिए।
वहीं, पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा था कि आरोपी पर बालिग की तरह केस चलाने की जरूरत है। पटना हाईकोर्ट ने जेजे बोर्ड को केस ट्रायल कोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया था। इससे पहले जेजे बोर्ड ने फैसला किया था कि नाबालिग के खिलाफ केस उसे बालिग न मानते हुए चलाया जाए। जबकि, सेशन कोर्ट ने जेजे बोर्ड के फैसले को पलटा था और उस पर बालिग के हिसाब से केस चलाने का फैसला सुनाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नाबालिग को बालिग मानकर केस चलेगा और दोषी पाए जाने पर सजा भी उसी के मुताबिक होगी।
