एथेनॉल मामले में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ अपमानजनक कंटेंट हटाया जाएगा, बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश
मुंबई। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के पक्ष में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एथेनॉल मामले में गडकरी से संबंधित अपमानजनक कंटेंट को हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के वकीलों को फटकार भी लगाई। नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि सोशल मीडिया पर एथेनॉल मामले में उनके खिलाफ भ्रामक, अभद्र, अपमानजनक और फेक वीडियो डाले गए थे।
नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा था कि डीपफेक और एआई वीडियो से उनके परिवार को ई20 पेट्रोल से जोड़ा गया था। दरअसल, सोशल मीडिया पर तमाम पोस्ट ऐसे आए थे, जिनमें दावा किया गया था कि गडकरी के बेटे की एथेनॉल फैक्ट्री है। इसी वजह से पेट्रोल में एथेनॉल मिक्स करने की वो वकालत करते हैं। इनमें अपमानजनक और अभद्र वीडियो भी थे। ऐसे ही एक इंस्टाग्राम वीडियो को गडकरी के वकील ने कोर्ट को दिखाया। जिस पर जस्टिस अरिफ डॉक्टर ने सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने वीडियो देखने के बाद माना कि सोशल मीडिया पर गडकरी के खिलाफ आया कंटेंट अश्लील और अपमानजनक है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे कंटेंट का किसी भी सार्वजनिक मंच पर स्थान नहीं होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि ये कंटेंट बच्चों और युवाओं समेत हर किसी के लिए उपलब्ध है। कोर्ट ने ये भी कहा कि गडकरी की ओर से अंतरिम राहत पाने के लिए मजबूत आधार पेश किया गया। इस मामले में सुनवाई के दौरान मेटा और गूगल की तरफ से भरोसा दिलाया गया कि वे सभी सूचीबद्ध आपत्तिजनक कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म से हटाएंगे। कोर्ट ने इस मामले में चार हफ्ते बाद सुनवाई का फैसला किया है। बता दें कि नितिन गडकरी एथेनॉल वाले पेट्रोल के पक्ष में बयान देते रहे हैं। हालांकि, पेट्रोल में एथेनॉल मिक्स करने का फैसला उनका मंत्रालय नहीं करता। इस बारे में पेट्रोलियम मंत्रालय ही फैसला करता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का काम यूपीए सरकार के दौर में शुरू हुआ था। उस वक्त पेट्रोल में 10 फीसदी एथेनॉल मिलाया जाता था। जिसे बढ़ाकर अब 20 फीसदी किया गया है।
