लोकसभा अध्यक्ष की चाय पार्टी में डीएमके छोड़ विपक्ष का कोई नेता नहीं गया, कनिमोझी की मौजूदगी से परिसीमन बिल पर अटकलों ने फिर पकड़ा जोर
नई दिल्ली। संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को खत्म हो गया। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा की कार्यवाही खत्म होने से पहले वंदे मातरम् के गायन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत तमाम सदस्य मौजूद थे। वहीं, कांग्रेस समेत विपक्षी नेता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चैंबर में चाय पार्टी में नहीं गए। जबकि, डीएमके की सांसद कनिमोझी इस चाय पार्टी में मौजूद रहीं।
वहीं, राज्यसभा के सभापति की ओर से सत्र समाप्ति के बाद दी गई चाय पार्टी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने हिस्सा लिया। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष की चाय पार्टी में डीएमके की कनिमोझी के शामिल होने के बाद उन अटकलों ने और जोर पकड़ा है कि उनकी पार्टी अब परिसीमन बिल पर मोदी सरकार का समर्थन करेगी। डीएमके ने अप्रैल में लोकसभा में परिसीमन बिल लाए जाने पर विरोध किया था। उसके बाद डीएमके तमिलनाडु की सत्ता भी गंवा बैठी है और पुराने साथी कांग्रेस ने भी उससे किनारा कर लिया है।
तमिलनाडु में कांग्रेस के 5 विधायक जीते थे। कांग्रेस ने वहां थलापति विजय की टीवीके सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया। इसकी वजह से डीएमके और कांग्रेस में तनातनी हो गई। दोनों के बीच नाराजगी इतनी बढ़ी कि डीएमके ने लोकसभा और राज्यसभा में अपने सांसदों को इंडी गठबंधन से अलग बिठाने की अर्जी दी। जिसके बाद डीएमके के सांसदों के लिए लोकसभा और राज्यसभा में अलग सीट आवंटन किया गया है। डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। परिसीमन बिल पर अगर डीएमके का समर्थन मिलता है, तो इसे दो-तिहाई बहुमत से पास कराने के लिए मोदी सरकार जरूरी संख्या हासिल कर सकती है। फिलहाल देखना है कि मोदी सरकार परिसीमन बिल को कब फिर संसद में पेश करती है। क्योंकि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने इसे पास न होने देने का दावा किया हुआ है।
