मद्रास हाईकोर्ट से डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को झटका, कोलाथुर सीट की सभी वीवीपैट पर्चियां फिर से गिनने की याचिका खारिज
चेन्नई। डीएमके सुप्रीमो और तमिलनाडु के पूर्व सीएम एमके स्टालिन को मद्रास हाईकोर्ट से झटका लगा है। मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने तमिलनाडु की कोलाथुर विधानसभा सीट पर इस साल हुए चुनाव की सभी 100 फीसदी वीवीपैट पर्चियों की फिर से गिनती की स्टालिन की याचिका खारिज कर दी है। मद्रास हाईकोर्ट की बेंच ने स्टालिन की याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना।
एमके स्टालिन इस साल तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कोलाथुर सीट से डीएमके प्रत्याशी थे। स्टालिन को सत्तारूढ़ टीवीके के प्रत्याशी वीएस बाबू ने हरा दिया था। कोलाथुर सीट के नतीजे आने के बाद स्टालिन ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाकर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। डीएमके सुप्रीमो ने वीएस बाबू के चुनाव को अमान्य और खुद को कोलाथुर सीट से निर्वाचित घोषित करने की अपील हाईकोर्ट से की थी। स्टालिन ने याचिका में अपील की थी कि मद्रास हाईकोर्ट चुनाव आयोग को कोलाथुर सीट की सभी वीवीपैट पर्चियों की फिर गिनती के लिए कहे। सभी 286 ईवीएम की जांच की मांग भी स्टालिन ने की थी।
स्टालिन ने याचिका में कहा था कि चुनाव नतीजे आने के बाद ही 7 मई 2026 को ईवीएम की जांच और सत्यापन के लिए चुनाव आयोग को आवेदन दिया था, लेकिन चुनाव आयोग ने 45 दिन बीत जाने के बाद 29 जुलाई से ये प्रक्रिया शुरू की। स्टालिन ने कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक कोलाथुर में इस्तेमाल पांच फीसदी ईवीएम यानी 14 मशीनों की जांच की जानी थी, लेकिन जांच के लिए पहले बैच की जो चार मशीनें ली गईं, उनमें से तीन ने काम करना बंद कर दिया। जिसके बाद चार अन्य ईवीएम ली गईं। जिनमें से एक काम नहीं कर रही थी। स्टालिन ने कहा कि चुनाव आयोग ने जांच में 45 दिन की देरी की। जिसकी वजह से हाईकोर्ट में वक्त पर याचिका दाखिल नहीं कर सके। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत रोक का प्रावधान उनके मामले में लागू नहीं होना चाहिए।
