नई दिल्ली। जेडीयू से निष्कासित मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की दिक्कतें और बढ़ सकती हैं। बाहुबली विधायक को फिर जेल जाना पड़ सकता है। दुलारचंद यादव की कथित हत्या के मामले में अनंत सिंह को जमानत मिली थी। अनंत सिंह की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई है। जिस पर शीर्ष अदालत 30 अक्टूबर को सुनवाई करने वाली है। दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में पटना हाईकोर्ट ने इस साल मार्च में अनंत सिंह को जमानत दी थी।
इलाके में दबंग की छवि रखने वाले दुलारचंद यादव की 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कथित तौर पर हत्या हुई थी। मोकामा में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के पक्ष में दुलारचंद यादव चुनाव प्रचार कर रहे थे। उस वक्त दुलारचंद यादव का सामना अनंत सिंह के काफिले से हुआ था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक दुलारचंद यादव की मौत किसी भारी वाहन से कुचलने की वजह से हुई थी। अनंत सिंह को इस मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। विधायक को मिली जमानत के खिलाफ दुलारचंद यादव के पौत्र नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
दुलारचंद यादव की कथित हत्या के बाद अनंत सिंह मोकामा सीट से विधानसभा चुनाव जीते थे। इस बार बिहार विधान परिषद के चुनाव में अनंत सिंह ने अपनी पार्टी जेडीयू के प्रत्याशी नीरज कुमार के विरोध का झंडा बुलंद किया। अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार को समर्थन देने के साथ ही नीतीश कुमार के करीबी ललन सिंह के खिलाफ भी बयान दिया। नतीजे में अनंत सिंह को छह साल के लिए जेडीयू से निष्कासित किया गया। उनकी विधायकी रद्द करने की चिट्ठी भी जेडीयू ने बिहार विधानसभा स्पीकर को सौंपी है। जेडीयू ने अनंत सिंह की नीलम देवी को भी पार्टी से हटाया। नतीजे में उनका दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री का ओहदा भी खत्म किया गया। नीलम देवी को सरकारी आवास भी खाली करने के लिए कहा गया है। अनंत सिंह अगर फिर जेल जाते हैं, तो जेडीयू का सहारा न होने के कारण दिक्कत में बढ़ोतरी हो सकती है।
