May 2, 2026

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‘द कश्मीर फाइल्स’ का असर, घाटी के आतंकियों की फिर खुलेगी फाइलें, कश्मीर के DGP ने किया इशारा

नई दिल्ली। हाल ही में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ इन दिनों हर तरफ सुर्खियों में छाई हुई है। मूवी को दर्शकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। द कश्मीर फाइल्स को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई कर रही है। वहीं फिल्म के रिलीज होने के बाद अब इस पर सियासत भी तेज हो गई है। वहीं फिल्म के रिलीज होने के बाद से दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा है और वो है यासीन मलिक और बिट्टा कराटे। जम्मू कश्मीर में हत्याओं के आरोपी रहे यासीन मलिक और बिट्टा कराटे की मुश्किलें बढ़ते दिख रही है। खबर है कि दोनों के खिलाफ हत्या के मामले में दर्ज केस फिर खोले जा सकते है। यह संकेत जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह की तरफ से मिले हैं। दरअसल जब मीडिया ने डीजीपी दिलबाग सिंह से सवाल पूछा गया कि यासीन मलिक और बिट्टा कराटे के खिलाफ दर्ज केसों को दोबारा खोला जाएंगे। जिस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा, हम जम्मू-कश्मीर में सभी आतंकियों के खिलाफ दर्ज मामलों में जांच करेंगे। किसी भी आतंकी को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

जानें कौन है बिट्टा कराटे

बिट्टा कराटे को लेकर चर्चाओं का सैलाब वर्तमान में अपने उफान पर है। खासकर ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म के निर्मित होने के उपरांत बिट्टा कराटे काफी सुर्खियों में है। बता दें कि कराटे एक अलगाववादी नेता हैं। इतना ही नहीं, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक साक्षात्कार के दौरान बिट्टा ने खुद 20 कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतारने की बात अपने जुबां से कुबूली थी।  बिट्टा पर 19 से अधिक उग्रवाद के मामले दर्ज हैं। बता दें कि 2008 में अमरनाथ विवाद के दौरान भी उसे गिरफ्तार किया गया था।

वहीं, अपनी इन्हीं असामाजिक और शरारती गतिविधियों की वजह से बिट्टा 16 सालों तक सलाखों के पीछे रहा है। हालांकि, 23 अक्टूबर, 2006 में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। वहीं, बिट्टा के संगठन जेकेएलएफ ने 1994म में एकतरफा युद्धविराम की घोषणा भी कर दी थी।

 जानिए कौन है यासीन मलिक 

वहीं, अगर यासीन मलिक की बात करें, तो उसे घाटी में अलगाववादी नेता के रूप में जाना जाता है। वह जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट से जुड़ा है। अभी सलाखों के पीछे है। यासीन मलिक पर 25 जनवरी 1990 में भारतीय वायुसेना कर्मियों पर आतंकी हमले में शामिल होने का आरोप है। इसमें वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित चार वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई थी।

यासीन पर पाकिस्ताानी आतंकियों के साथ संबंध रखने के आरोप लगते रहे हैं। 1990 में हिंदुओं का कत्लेआम कर उन्हें कश्मीर से बेदखल करने के आंदोलन में यासीन जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 

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