April 30, 2026

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अपनी ही पार्टी में घिरे अखिलेश, मौलाना शहाबुद्दीन का सपा प्रमुख पर तीखा हमला

नई दिल्ली। पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और अभी विधान परिषद चुनाव में मिली हार के बाद से अखिलेश यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक वक्त में कभी यूपी MLC में दबदबा रखने वाली सपा पार्टी इस बार चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। वहीं भाजपा ने 36 में से 33 सीटों पर अपना कमल खिलाया। चुनाव में करारी शिकस्त और फिर उसके बाद पार्टी के नेताओं की नाराजगी की खबरें लगातार सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ा रही है। वहीं, अब इसी क्रम में सपा प्रमुख को एक बार फिर झटका लगने की संभावना है।

नई दिल्ली। पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और अभी विधान परिषद चुनाव में मिली हार के बाद से अखिलेश यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक वक्त में कभी यूपी MLC में दबदबा रखने वाली सपा पार्टी इस बार चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। वहीं भाजपा ने 36 में से 33 सीटों पर अपना कमल खिलाया। चुनाव में करारी शिकस्त और फिर उसके बाद पार्टी के नेताओं की नाराजगी की खबरें लगातार सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ा रही है। वहीं, अब इसी क्रम में सपा प्रमुख को एक बार फिर झटका लगने की संभावना है।

दरअसल, पार्टी के मुस्लिम नेता ही अखिलेश यादव को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आल इंडिया तंजीम उलेमा ए इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रिज़वी ने एक चैनल के साथ बातचीत में ये स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मुसलामानों को समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ देना चाहिए और दो राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस या फिर बीजेपी को विकल्प के रूप में देखना चाहिए। शहाबुद्दीन रिज़वी ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सामने आए नतीजे आने के बाद से ही राज्य के मुसलमान मायूस हैं। मन में ये सवाल उठ रहा है कि मुसलमानों का भविष्य क्या होगा?। ऐसे में हमें इसे एक भविष्य के लिए एक सबक के तौर पर लेते हुए एक नई रणनीति के साथ आने की जरूरत है।

मुसलमानों के हितैषी नहीं अखिलेश- शहाबुद्दीन रिज़वी

बातचीत के दौरान अखिलेश यादव पर हमला पर करते हुए मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि अब नए हालात हैं और नए तकाज़े है। ऐसे में मुसलमानों को अब नई रणनीति बनानी चाहिए। उन्हें समाजवादी पार्टी के अलावा दूसरे विकल्पों पर विचार करना चाहिए। मौलाना ने आगे अखिलेश यादव पर हमला बोला और कहा कि अखिलेश यादव मुसलमानों के हितैषी नहीं है। उन्होंने हर जगह मुस्लिम बडे़ चेहरो को पीछे रखने की पूरी कोशिश की और अकेले ही चुनाव प्रचार करते नजर आए। मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी में ज़मीन और आसमान का फ़र्क बताते हुए मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि चुनाव के दौरान में कहीं गई बातों का समाजवादी पार्टी के नेताओं ने विरोध किया था, मगर अब उन्हें मेरी ही बातें अच्छी लग रही है।

आपको बता दें, बीते दिन आजम खान  के समर्थन में सपा के एक बड़े नेता ने अखिलेश यादव को झटका देते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इतनी ही नहीं पार्टी से इस्तीफा देने वाले सलमान जावेद राइन ने अखिलेश यादव पर जोरदार प्रहार भी किया और अखिलेश यादव पर मुसलमानों के लिए न बोलने का आरोप भी लगाया था। अपने पत्र में सलमान जावेद राइन ने लिखा, मुसलमानों के साथ हो रहे जुल्म के खिलाफ, प्रदेश से लेकर जिले तक सत्ता की मलाई खाने वाले समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों, नेताओं का आवाज ना उठाना, आजम खां साहब के परिवार सहित जेल में डाल दिया गया। नाहिद हसन को जेल भेज दिया गया। शहजिल इस्लाम का पेट्रोल पंप गिराया दिया गया। अखिलेश यादव खामोश रहे। जो कायर नेता अपने विधायकों के लिए आवाज नहीं उठा सकता, वो आम कार्यकर्ता के लिए क्या आवाज उठाएगा?

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