April 30, 2026

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राज ठाकरे की शिंदे कैबिनेट में होगी एंट्री? कैबिनेट विस्तार से पहले MNS चीफ से मिले डिप्टी सीएम फडणवीस

नई दिल्ली। इस मुलाकात को क्या नाम दें? इस मुलाकात के क्या अर्थ निकाले जाए? इस मुलाकात का निकट भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति में क्या कुछ असर देखने को मिल सकता है? आखिर इस मुलाकात के दौरान ऐसा क्या हुआ कि महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चागोशियों का बाजार गुलजार हो गया? अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि आज मुलाकात के संदर्भ में भूमिकाओं का जाल बुनाए जा रहे हैं। क्या किसी नेता कि किसी दूसरे नेता से मुलाकात हुई है, तो अगर आप भी कुछ ऐसा ही सोच रहे हैं, तो बिल्कुल सही सोच रहे हैं।

दरअसल, ये मुलाकात महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम फडणवीस और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बीच हुई है। जरा ध्यान दीजिएगा….राज ठाकरे खुद फडणवीस के आवास पर उनसे मुखातिब होने पहुंचे थे। अब राज ठाकरे और शिवसेना के बीच के सियासी रिश्ते कितने दुरूस्त हैं, ये तो आप जानते ही होंगे और जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से राज ठाकरे हिंदुत्व का पताका बुलंद करने में मसरूफ हैं, इन सबके बीच राज ठाकरे की फडणवीस से हुई मुलाकात ने सियासी गलियारों में चर्चाओं के बाजार को गुलजार कर दिया है। खैर, छोड़िए उन बातों को। इनके बारे में किसी और दिन बात करेंगे। हालांकि, इन दोनों दिग्गज नेताओं के बीच किन मुद्दों पर वार्ता हुई है, यह तो जाहिर नहीं हो पाया है, लेकिन इस मुलाकात ने चर्चाओं का बाजार जरूर गुलजार कर दिया है।

चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल विस्तार से पहले मनसे भी महाराष्ट्र कैबिनेट में एंट्री लेगी? चर्चा इस बात को लेकर भी है कि क्या आगामी दिनों में मनसे के नेताओं को भी मंत्रिमंडल मे मंत्री पद दिए जाएंगे? चर्चा इस बात को लेकर भी है कि क्या उद्धव के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने वाले शिंदे की नेप्थ्य में रहकर भी तो कहीं राज ठाकरे ने भी तो मदद नहीं की थी?, क्योंकि बेशक दोनों राज ठाकरे और उद्धव ठाकारे पारिवारिक रिश्ते में एक दूसरे के भाई हों, लेकिन इन दोनों की राजनीतिक रिश्तों की कटुता से पूरा महाराष्ट्र वाकिफ है। ऐसे में शिंदे अगर उनकी मुलाकात को लेकर इस तरह की चर्चाएं हो रही हैं कि आगामी दिनों में मनसे भी शिदे गुट में शामिल हो सकते हैं, तो कुछ गलत नहीं है। खैर, जो भी हो, लेकिन इतना साफ है कि दोनों की मुलाकातों ने महाराष्ट्र की राजनीति का पारा गरमा दिया है।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में सरकार तो बन चुकी है, लेकिन मंत्रिमंडल का विस्तार अभी तक नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि मंत्रिमंडव विस्तार के दौरन शिंदे के खेमे को 30 फीसद मंत्री पद दिए जा सकते हैं और रही बात बीजेपी तो वित्त, रक्षा, राजस्व और जलसंसाधन जैसे अहम पद बीजेपी के पाले में रहेंगे, जिसके मद्देनजर यह कहना गलत नहीं होगा कि बेशक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर एकनाथ शिंदे काबिज होने में सफल रहे हों, लेकिन सरकार में पूरा दबदबा बीजेपी का ही बरकरार रहेगा। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि महाराष्ट्र में बीजेपी में अहम पद बीजेपी अपने पास ही रखना चाहती है, ताकि सत्ता की कुंजी उनके हाथ में ही रहे। अब ऐसे में आगामी दिनों में महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक स्थिति क्या कुछ रुख अख्तियार करती है। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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