July 16, 2026

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सियासी पिच पर क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा का जलवा, कांग्रेस को हराकर हासिल की जीत

नई दिल्ली। पहली बार गुजरात के चुनावी मैदान में उतरीं भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी रविंद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा ने भारी मतों से जीत हासिल की है। बीजेपी ने उन्हें जमानगर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा था। गत दिनों चुनाव प्रचार के दौरान उनके पति रविद्र जडेजा खुद भगवा वस्त्र धारण कर अपनी पत्नी के समर्थन में प्रचार करते दिखें थें। आपको बता दें कि रिवाबा जडेजा ने कांग्रेस के अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को बिपेंद्र सिंह चतुरसिंह को 40 हजार के अधिक मतों से चुनाव दंगल में पटखनी दी है। इस विधानसभा सीट में कुल इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,63,483 वोट हैं। इनमें 1,34,765 पुरुष, जबकि 1,28,717 वोट महिलाओं के हैं।

बता दें, रिवाबा जडेजा पहले करणी सेना की अध्य़क्ष भी रह चुकी हैं। साल 2019 में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था। उस वक्त उनकी पीएम मोदी की मुलाकात वाली तस्वीर भी चर्चा में रही थी। तभी से यह माना जाने लगा था कि उन्हें चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है, जो कि अब बिल्कुल सच साबित हुआ है। लोकसभा चुनाव के बाद से ही रिवाबा उत्तर गुजरात में सक्रिय रहने लगी थीं। जिसका ही यह नतीजा हुआ कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा।

रिवाबा पेशे से इंजीनियर हैं। साल 2016 में ही रिवाबा और रविंद्र जडेजा शादी के बंधन में बंधे थे। बेशक, रिवाबा पेशे से इंनीनियर हों, लेकिन सियासी मसलों को लेकर उनकी समझ को लेकर उनके प्रशंसक उनके खूब कायल हैं। वे अक्सर ट्विटर पर अपनी पोस्टों को लेकर खूब सुर्खियों में रहतीं हैं। इसके अलावा अगर रविंद्र जडेजा और रिवाबा जडेजा के लव स्टोरी पर प्रकाश डाले तो दोनों की मुलाकात साल 2016 में हुई थी। तभी दोनों एक दूसरे को अपना दिल दे बैठे थे। जिसके बाद दोनों ने शादी के बंधन में बंधने का फैसला किया। उधर, रविंद्र जडेजा का सियासत से पुराना नाता रहा है। उनकी बहन नैना जडेजा कांग्रेस की महिला इकाई की अध्यक्ष भी हैं।

इसके अलावा रिवाबा महिलाओं के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं। ध्यान रहे, रिवाबा और नैना जडेजा की अक्सर बहस होती रहती है। दोनों अलग-अलग पार्टी में हैं। तो ऐसी सूरत में राजनीतिक विचारधाराओं में काफी अंतर लाजिमी है। बता दें, साल 2021 में दोनों के बीच मास्क पहनने को लेकर रार देखने को मिली थी। वहीं, अब जामनगर की जनता ने रिवाबा पर भरोसा जताया है, तो ऐसी स्थिति में आगामी दिनों में वे जनता की अपेक्षाओं पर कितनी खरी साबित हो पाती हैं। इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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