June 26, 2026

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India China Clash : चीनी भाइयों से नेहरू के प्यार के कारण UNSC में कुर्बान हो गई भारत की जगह : गृहमंत्री अमित शाह

नई दिल्ली। भारत चीन सीमा विवाद के बीच अब जवाहर लाल नेहरू और UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। आज अरुणाचल प्रदेश के तवांग का मुद्दा संसद में जमकर गूंजा। एक ओर जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मामले की जानकारी दी। वहीं, विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। इसे लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाए कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कारण ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सीट गंवा दी थी। साथ ही उन्होंने कांग्रेस को राजीव गांधी फाउंडेशन में चीनी दूतावास की राशी को लेकर भी सवालों के घेरे में लिया।

बता दें कि UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर नेहरू के जमाने से चले आ रहे विवाद पर गृहमंत्री शाह ने मंगलवार को नेहरू सरकार पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता छोड़ने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ‘नेहरू जी के प्रेम के कारण ही भारत की यूएनएससी की स्थायी सदस्यता कुर्बान हो गई। जिस वक्त गलवान में हमारे जवान चीनियों से भिड़ रहे थे उस वक्त चीनी दूतावास के अधिकारियों को कौन रात्रिभोज दे रहा था। इसका शोध हुआ क्या। उनकी सरकार में चीन ने पूरे अरुणाचल पर दावा किया। क्या इसपर कभी शोध किया गया।’

गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर राजीव गांधी फाउंडेशन से जुड़े सवाल पर चर्चा से बचने के कई गंभीर आरोप जड़े। संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान शाह ने कहा कि RGF को चीनी दूतावास से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा मिले हैं और 50 लाख रुपये नाइक से मिले। उन्होंने आरोप लगाए कि जब कांग्रेस ने दावा किया कि दूतावास से मिली रकम भारत और चीन के संबंधों पर रिसर्च के लिए थी। शाह ने कहा कि देश जानना चाहता है कि क्या 1962 के युद्ध के दौरान भारत ने जो जमीन गंवाई है उसे जांच में रखा गया है।

इसके अलावा अमित शाह ने ये भी कहा, ‘मैंने पूरी सूची देखी और सवाल नंबर 5 को देखने के बाद मैं कांग्रेस की चिंता को समझ पा रहा हूं। वह प्रश्न राजीव गांधी फाउंडेशन के फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेग्युलेशन एक्ट (FCRA) लाइसेंस रद्द होने को लेकर था…। अगर उन्होंने मुझे अनुमति दी होती, तो मैं संसद में जवाब देता कि राजीव गांधी फाउंडेशन को 2005-2007 के बीच चीनी दूतावास से 1.35 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है, जो FCRA के तहत उचित नहीं है। नियमों के अनुसार, गृहमंत्रालय ने पंजीकरण रद्द कर दिया

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