दवा के मामले में चीन को पटखनी देने की तैयारी में भारत, इस प्लान से पड़ोसी मुल्क को देगा मात
शिमला। चीन दवा तैयार करने के लिए जरूरी सॉल्ट यानी API तैयार करने और बेचने के मामले में दुनिया में नंबर वन है, लेकिन उसकी इस बादशाहत को खत्म करने की तैयारी भारत ने कर ली है। चीन दवाइयों का एपीआई बेचकर करोड़ों डॉलर हर साल कमाता है, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब इस मामले में भारत के सामने वह घुटने टेक देगा। सरकार ने हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में देश के पहले एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट यानी एपीआई सॉल्ट बनाने की फैक्टरी शुरू करने का फैसला किया है। यह फैक्टरी नालागढ़ के पलासड़ा में बनेगी। पहले फैक्टरी को पंजाब में लगाए जाने की योजना थी, लेकिन हिमाचल में सुविधाओं को देखते हुए यहां फैक्टरी लगाने का फैसला हुआ।
यह फैक्टरी गुजरात के एक उद्योगपति लगाने जा रहे हैं। हिमाचल सरकार के उद्योग विभाग ने इसके लिए 342 बीघा जमीन भी दी है। फैक्टरी तैयार करने में 850 करोड़ रुपए लगेंगे और इससे करीब 2000 लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इस एपीआई फैक्टरी में एंटीबायोटिक का सॉल्ट बनेगा। अब तक चीन से सॉल्ट मंगाना पड़ता है। फैक्टरी शुरू होने के बाद चीन से किसी भी दवा निर्माता को एंटीबायोटिक का एक्टिव सॉल्ट मंगाने की जरूरत नहीं रहेगी।
हिमाचल में ही दवा बनाने वाली 750 फैक्टरियां हैं। अब पलासड़ा में एपीआई की फैक्टरी बनने से इन कंपनियों को सस्ते में एक्टिव सॉल्ट मिल सकेगा। जिससे दवाइयों की कीमत भी काफी कम हो जाएगी और आम लोगों को फायदा पहुंचेगा। हिमाचल प्रदेश की सरकार इसके अलावा तमाम उद्योगों को भी यहां लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अलग-अलग जगह जमीनें चिन्हित की गई हैं। जिन्हें सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए उद्योगपतियों को दिया जा रहा है। इससे राज्य के लोगों को रोजगार के बेहतर साधन मिल रहे हैं और दूसरे राज्यों में पलायन भी रोकने में मदद मिल रही है।
