April 23, 2026

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कहां से कहां पहुंच गई शिवसेना! पहले राजीव गांधी से चिढ़ती थी, अब पुरस्कार का नाम रख रही

मुंबई। शिवसेना शायद देश की अकेली पार्टी होगी, जिसने सत्ता हासिल करने के लिए अपना चाल, चरित्र और चेहरा तीनों इतनी तेजी से बदले होंगे। इसका सबूत है पूर्व पीएम राजीव गांधी का नाम। इस नाम से पहले शिवसेना चिढ़ती थी, लेकिन अब उसके राज में राजीव के नाम पर पुरस्कार का नाम रखा जा रहा है। ज्यादा पुरानी नहीं महज 10 साल पहले 2009 की बात है। तब सरकार ने मुंबई के बांद्रा-वर्ली सी लिंक परियोजना को आम जनता के लिए खोला था।

सरकार ने इसका नाम राजीव गांधी के नाम पर रखा। इसका शिवसेना ने जमकर विरोध किया था। शिवसेना उस वक्त अपने चिन्ह बाघ की तरह राजीव के नाम के खिलाफ दहाड़ रही थी। ये तो हो गया 10 साल पुराना किस्सा। अब सिर्फ 5 साल पुरानी बात कर लेते हैं। मामला 2017 का है। तब शिवसेना ने राजीव गांधी आरोग्यदायी योजना का नाम बदलकर महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना करवा लिया था।

अब शिवसेना सरकार में कांग्रेस कोटे के मंत्री सतेज पाटिल ने आईटी अवॉर्ड को राजीव गांधी के नाम से शुरू करने का एलान किया है, लेकिन न तो इसके खिलाफ सीएम उद्धव ठाकरे की आवाज निकली और न ही शिवसेना के किसी और नेता ने राजीव के नाम पर कोई हो-हल्ला मचाया।

बता दें कि शिवसेना के सुप्रीमो और संस्थापक रहे बाल ठाकरे गांधी परिवार को जमकर कोसते थे, लेकिन सत्ता हासिल करने के लिए जब उनके बेटे उद्धव ने कांग्रेस का साथ लेने का फैसला किया, तो दिल्ली में अपने बेटे आदित्य के साथ आकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल से मुलाकात की थी।

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