मुख्यमंत्री बनते ही मोहन माझी ने पूरा किया वादा, खुलवा दिए जगन्नाथ धाम के चारों द्वार, जानिए क्या है इनका रहस्य
नई दिल्ली। ओडिशा ने नए मुख्यमंत्री मोहन माझी ने पद संभालते ही अपनी पार्टी बीजेपी का एक वादा पूरा कर दिया। पुरी स्थित श्री जगन्नाथ धाम के सभी चारों द्वार आज से श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए गए हैं। इस अवसर पर मोहन माझी ने श्री जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल ने मंदिर के संरक्षण और विकास परियोजनाओं के लिए 500 करोड़ रुपये का एक कोष गठित करने का भी निर्णय लिया है। मंदिर के सभी चारों दरवाजे खुल जाने से अब श्रद्धालुओं को दर्शन करने में सुगमता होगी।
अभी तक मंदिर का सिर्फ एक ही द्वार खुला था बाकी तीन द्वार बंद थे जिसके चलते भीड़ ज्यादा हो जाती थी और श्रद्धालुओं को लंबी लाइन में लगकर दर्शन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी। गौरतलब है कि मंदिर के तीन द्वार बंद करने का फैसला कोविड के दौरान लिया गया था। ओडिशा की तत्कालीन बीजेडी सरकार ने ये निर्णय लिया था लेकिन कोविड खत्म होने के बाद भी तीन द्वार नहीं खोले गए जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती थी। विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने वादा किया था कि अगर ओडिशा में उनकी सरकार बनी तो वो जगन्नाथ धाम के चारों दरवाजे खुलवा देगी। मुख्यमंत्री मोहन माझी ने शपथ ग्रहण के अगले ही दिन अपना ये वादा पूरा कर दिया।
आपको बता दें कि जगन्नाथ मंदिर के चारों दिशाओं पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण में चार द्वार हैं। मंदिर के पूर्वी द्वार को सिंहद्वार कहा जाता है। यह मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार है। इस द्वार पर झुकी हुई मुद्रा में दो शेरों की प्रतिमाएं हैं। माना जाता है कि इस द्वार से मंदिर में प्रवेश करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं मंदिर का पश्चिमी द्वार व्याघ्र द्वार कहलाता है। इस प्रवेश द्वार पर बाघ की प्रतिमा मौजूद है। कहा जाता है कि यह धर्म के पालन करने की शिक्षा देता है। मंदिर का उत्तरी द्वार हस्ति द्वार कहलाता है। इस द्वार के दोनों तरफ हाथी की प्रतिमाएं लगी हैं। हाथी को माता लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। माना जाता है कि ये द्वार ऋषियों के प्रवेश के लिए है। जबकि मंदिर का दक्षिणी द्वार अश्व द्वार कहलाता है। इस द्वार के दोनों तरफ घोड़े की मूर्तियां लगी हैं। इन घोड़ों पर भगवान जगन्नाथ और बालभद्र सवार हैं। इस द्वार को विजय के रूप में जाना जाता है।
