चंपाई सोरेन की बगावत के बाद झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को बचाए रखने होंगे 4 विधायक, वरना सरकार पर आएगा बड़ा संकट
रांची। झारखंड में पूर्व सीएम चंपाई सोरेन की हेमंत सोरेन बगावत से राज्य का सियासी माहौल दिलचस्प हो गया है। सीएम हेमंत सोरेन ने बीती 8 जुलाई 2024 को ही राज्यसभा में विश्वासमत हासिल किया था। उस वक्त उनको 45 वोट मिले थे। अब चंपाई सोरेन साथ नहीं हैं। ऐसे में हेमंत सोरेन को मिले 45 वोट में से एक वोट कम हो गया है। अगर बीजेपी अब 4 और विधायकों को अपने पाले में करने में सफल हो जाती है, तो हेमंत सोरेन की सरकार गिरने का संकट पैदा हो जाएगा। उनके पास तब बहुमत नहीं रहेगा।
झारखंड विधानसभा में 81 सीटें हैं। बहुमत का आंकड़ा 41 सीटों का है। चंपाई सोरेन की बगावत के बाद हेमंत सोरेन के पक्ष में 44 विधायक ही रह गए हैं। साल 2019 की बात करें, तो हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंडम मुक्ति मोर्चा को 30 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, बीजेपी को 25 सीट, कांग्रेस को 16, झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) को 3, आजसू को 2, सीपीएम को 1 सीट, आरजेडी को 1, एनसीपी को 1 और 2 निर्दलीयों को जीत हासिल हुई थी। आरजेडी, सीपीएम और कांग्रेस से जेएमएम ने गठबंधन कर सरकार बनाई थी।
झारखंड में इसी साल के अंत तक विधानसभा के चुनाव होने हैं। चंपाई सोरेन के साथ छोड़ने से हेमंत सोरेन को झटका तो लगा है, लेकिन उनकी जेएमएम के नेता कह रहे हैं कि चंपाई सोरेन पर हेमंत सोरेन ने भरोसा किया और उनको झारखंड का सीएम बनाया। जेएमएम के नेता अब चंपाई सोरेन पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, चंपाई सोरेन ने जेएमएम में अपने अपमान का मुद्दा उठा रखा है। अगर चंपाई सोरेन के साथ जेएमएम के कुछ और विधायक गए, तो हेमंत सोरेन की सरकार मुश्किल में पड़ सकती है। तब बहुमत के लिए 41 की संख्या जुटाने के लिए हेमंत सोरेन को बीजेपी में ही तोड़फोड़ करनी होगी।
