जानिए कैसे होता है कांगो बुखार?, राजस्थान के जोधपुर में महिला की इस बीमारी से मौत होने पर मचा हड़कंप
नई दिल्ली। राजस्थान के जोधपुर में 51 साल की एक महिला की कांगो बुखार से मौत हो गई है। इसके बाद राज्य में हड़कंप मचा है। जोधपुर में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। साथ ही महिला जिस इलाके में रहती थी, वहां सैनेटाइजेशन भी कराया जा रहा है। महिला की मौत की खबर से आपको पता चल ही गया होगा कि कांगो बुखार कितना खतरनाक हो सकता है। आपको बताते हैं कि आखिर कांगो बुखार कैसे फैलता है और इससे बचने का क्या उपाय आप अपना सकते हैं?
कांगो बुखार का नाम रायमियन कांगो हैमरेज फीवर है। ये जानवरों से इंसान में फैलता है। कांगो बुखार के वाहक किलनी यानी टिक होते हैं। कुत्ते और बिल्लियों में गर्मी और बारिश के मौसम में टिक आ जाते हैं। ये टिक जूनोटिक वायरस के वाहक होते हैं। टिक जब कुत्ते या बिल्ली के शरीर में होते हैं, तो वे कांगो बुखार के वायरस को उनके शरीर पर छोड़ देते हैं। वायरस ग्रस्त कुत्ते या बिल्ली के संपर्क में आने से इंसान भी कांगो बुखार से पीड़ित होता है।
कांगो बुखार में भी ज्यादातर वही लक्षण होते हैं, जो अन्य वायरस के कारण इंसानों में दिखते हैं। कांगो बुखार से पीड़ित इंसान की मांसपेशियों में काफी दर्द होता है। कमजोरी, कमर का दर्द, पेट में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, आंखों में जलन जैसे लक्षण भी कांगो बुखार से ग्रस्त इंसान में पाए जाते हैं। इससे बचने के लिए कुत्ते या बिल्ली से दूरी बनानी चाहिए। घर में अगर कुत्ता या बिल्ली पाली है, तो जरूर उसे टिक यानी किलनी से बचाएं। टिक मारने की दवा आप जानवरों के डॉक्टर से पता कर सकते हैं। ये शैंपू और पिलाने की दवा के तौर पर आता है। इसके अलावा उपरोक्त लक्षण अगर दिखें, तो तत्काल अपने डॉक्टर से संपर्क करें। कांगो बुखार होने पर खुद को आइसोलेट करना भी जरूरी है। साथ ही घर में सफाई रखना भी आवश्यक है। टिक यानी किलनी दिखे, तो उसे मारकर जला दें। इससे कांगो वायरस को रोकने में मदद मिलेगी।
