भारत से समझौते के बावजूद चीन की मंशा पर सवाल, एलएसी के पास कर रहा सैन्य अभ्यास
नई दिल्ली। एलएसी पर लंबे तनाव के बाद चीन ने भारत के साथ समझौता तो कर लिया, लेकिन अब वो एक बार फिर सैन्य अभ्यास कर रहा है। जानकारी के मुताबिक चीन की सेना एलएसी के पास शिनच्यांग प्रांत में उन्नत ड्रोन, मानवरहित सिस्टम और अन्य हथियारों के साथ सैन्य अभ्यास कर रही है। शिनच्यांग सैन्य कमान की रेजीमेंट इस सैन्य अभ्यास में जुटी है। चीन के इस ताजा सैन्य अभ्यास से साफ है कि वो इस इलाके में अपनी ताकत एक बार फिर दिखाने में जुटा है। चीन के ताजा सैन्य अभ्यास और उसकी मंशा देखते हुए इस पर भारतीय सेना की भी नजर है।
भारत और चीन के बीच एलएसी पर 2020 से ही तनाव था। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की थी। इस पर भारतीय सेना के कर्नल बी. संतोष बाबू ने अपने जवानों के साथ उनका प्रतिरोध किया था। इस दौरान संघर्ष में चीन के 40 जवान मारे गए थे। जबकि, भारत के कर्नल समेत 20 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद ही पूरे एलएसी पर चीन की सेना का जमावड़ा बढ़ा था और भारत ने भी उसका मुकाबला करने के लिए बड़ी तादाद में सेना, टैंक, तोप और लड़ाकू विमानों की तैनाती की थी। लंबे समय तक गतिरोध चलने के बाद भारत और चीन के बीच 21 अक्टूबर 2024 को समझौता हुआ था। जिसके तहत देपसांग और डेमचोक में भारतीय सेना ने फिर गश्त शुरू की और दोनों देशों के सैनिक एलएसी से पीछे हटे।
जानकारी के मुताबिक भारत की सेना भी शीतकालीन युद्धाभ्यास कर रही है। इसके अलावा मोदी सरकार के दौर में एलएसी तक तेजी से सेना को पहुंचाने के लिए आधारभूत संरचनाएं बनाई गई हैं। लद्दाख में एलएसी तक तमाम सड़कों का निर्माण हुआ है। साथ ही जवानों को भयंकर सर्दी काटने के लिए यहां रहने की व्यवस्था और उन्नत हथियार भी दिए गए हैं। चीन हमेशा पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को अपने तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है। वहीं, भारत का कहना है कि मैकमोहन लाइन दोनों देशों की सीमा है। इस मैकमोहन लाइन को मानने से चीन इनकार करता है।
